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Diabetes Ya Sugar Me Kya Na Khaye: 10 Cheezen Aapko Turant Chhod Deni Chahiye Yadi Aap Diabetes Ya Sugar Ke Marij Hain

आपको डायबिटीज है इस बात का पता चलते ही आपकी पूरी दुनिया ही बदल जाती है। आप मरीज और सब डॉक्टर बन जाते हैं और तरह तरह की सलाह देने लगते हैं। तुम्हे यह खाना चाहिए तुम्हे वह नहीं खाना चाहिए। दिन में चार बार खाओ सुबह में टहलो रोटी खाओ चावल मत खाना आदि आदि। मरीज बेचारा बहुत ही कन्फ्यूज्ड हो जाता है। उसके दिमाग में भय उत्पन्न हो जाता है और उसे अपना जीवन नीरस लगने लगता है। वह हमेशा भय में रहता है हर चीज़ खाने में डरने लगता है। कभी कभी वह इतना परहेज़ करने लगता है कि उसका शुगर लेवल मिनिमम से भी नीचे चला जाता है। यह भी स्थिति खतरनाक होती है। डायबिटीज का पता लगे तो  हमें घबराना नहीं चाहिए।  आराम से किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए और उसकी सलाह के अनुसार दवा और परहेज करना चाहिए। डायबिटीज यदि नियंत्रण में है तो फिर घबराने की कोई बात नहीं। अतः समय समय पर इसकी जांच करवाते रहना चाहिए।
डायबिटीज में आपका खान पान और आपकी जीवन शैली का काफी महत्व है। मरीज को डॉक्टर की सलाह का पूरा ध्यान से पालन करना चाहिए। साथ ही खाने पीने की कुछ चीज़ें जो हमारे शुगर लेवल को बढ़ाती हैं उनकी जानकारी रखनी चाहिए। इसमें जानकारी…

Hysteria Kya Hai

हिस्टीरिया महिलाओं में होने वाली एक मानसिक बीमारी है जो प्रायः पंद्रह से बीस वर्ष की अवस्था में ज्यादा होती है। यह वास्तव में न्युरोसिस का ही एक प्रकार होता है। इसे सामान्य भाषा में गुल्म रोग या वायु भी कहते हैं। इसे स्त्रियों का रोग इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका अधिकांश शिकार स्त्रियां ही होती हैं। इसे कई बार लोग गलती से मिर्गी समझ लेते हैं क्योंकि इसके कुछ लक्षण मिर्गी से मिलते जुलते हैं। इसमें स्त्रियों में तरह तरह के दौरे, बेहोशी तथा अन्य हरकतें पायी जाती हैं।  हमारे समाज में हिस्टीरिया के रोगी को प्रायः हेय दृष्टि से देखा जाता है और इसके रोगी और उसके परिवार वालों को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है। इसका कारण यह है कि यह माना जाता है कि स्त्रियों में तीव्र यौन इच्छा को दबाने से इस रोग की उत्पत्ति होती है परन्तु यह पूर्ण सत्य नहीं है। यह रोग का एक कारण हो सकता है पर सम्पूर्ण कारण नहीं। कई बार कई अन्य मानसिक तनाव या सदमे की वजह से भी इस रोग की उत्पति होती है। मन में कोई इच्छा दबाना, कोई शिकायत या दुःख जिसे रोगी न तो किसी से कह सकता है और न उसे दूर कर सकता है और अंदर ही अंदर कुढ़ता रह…

Mirgi Ya Epilepsy Kya Hai

हमारा मस्तिष्क एक बहुत ही जटिल संरचना है। इसमें हर समय कई तरह की कॅल्क्युलेशन्स, इनपुट आउटपुट कमांड्स आदि के सिग्नल्स विद्युत् तरंगों के रूप में गतिमान होते रहते हैं। ये तरंगें तंत्रिकाओं न्यूरॉन्स के माध्यम से पूरे शरीर में प्रवाहित होती रहती हैं। इन्ही सिग्नल्स के द्वारा हमारा शरीर हरकत करता है और किसी काम को हम अंजाम देते हैं। हमारा देखना, सूंघना, सुनना, स्पर्श करके महसूस करना चलना फिरना आदि सारी क्रियाओं के कमांड्स हमारे दिमाग से मिलते हैं। इसके लिए इन अंगों के माध्यम से इनपुट सिग्नल्स विद्युत् तरंगों के माध्यम से दिमाग को भेजा जाता है जिसके फलस्वरूप दिमाग प्रतिक्रिया देता है और फिर विद्युत् तरंगों के माध्यम से उन्हें कमांड्स मिलते हैं। कभी कभी इन विद्युत् तरंगों के प्रवाह में ताल मेल के असंतुलन से शार्ट सर्किट जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है जिससे कि शरीर असामान्य हरकत करने लगता है और व्यक्ति को झटके आने लगते हैं दौरे पड़ने लगते हैं हाथ पैर अकड़ जाता है। इस तरह की स्थिति को सामान्य बोलचाल की भाषा में मिर्गी, अपस्मार, फरका या एपिलेप्सी कहा जाता है। 
मिर्गी वास्तव में एक न्यूरोलॉजिकल ड…

Social Media Aur Internet Addiction Disorder

क्या आप भी दो नीली टिक होने का इंतज़ार करते हैं और नहीं होने पर बेचैन हो जाते हैं बार बार चेक करते हैं  क्या आप भी लाइक्स और व्यूज गिनते हैं क्या आप भी बार बार मैसेज इन्फो चेक करते हैं ? यदि हाँ तो आप नेट एडिक्ट यानि आपको भी नेट के नशे ने अपने चपेट में ले लिया है और जिस प्रकार एक नशेड़ी नशे में अपनी सूध बुध खो बैठता है ठीक उसी प्रकार नेट एडिक्ट भी मानसिक रूप से चेतनाशून्य हो जाता है। उसका किसी काम में मन नहीं लगता है वह अपने काम के प्रति लापरवाह और चिड़चिड़ा हो जाता है कभी कभी वह निराश और हिंसक भी हो जाता है।
आज हम इंटरनेट युग में जी रहे हैं या यूँ कहें इंटरनेट हमारी जिंदगी का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन चूका है।  विद्युत् शक्ति के बाद यही एक चीज़ है जिस पर लगभग सारी चीज़ें निर्भर हो गयी हैं। सारे कामों में इसका दखल है। इंटरनेट ने हमारी जिंदगी को काफी आसान और आरामदायक बना दिया है। मोबाइल क्रांति के बाद
इंटरनेट क्रांति के  साथ ही कई सामजिक और राजनितिक बदलाव हुए। इंटरनेट भारतीय जनमानस को अपना गुलाम बना चूका है। लोगों की सोच, उनके विचार , सामाजिक व्यवहार, रहन सहन सब पर इंटरनेट का प्रभाव देखा…

Japani Encephalitis Ya Japani Bukhar Kya Hai, Bachne Ke Upay

जुलाईका महीना शुरू होते ही भारत में खासकर उत्तर भारत में कई बीमारीओं का प्रकोप चालू हो जाता है इन बीमारियों में डेंगू,चिकेनगुनिया,जापानीज इंसेफ्लाइटिस आदि प्रमुख हैं। ये सारी बीमारियां काफी खतरनाक और जानलेवा हैं। अकेले जापानी इंसेफ्लाइटिस ने ही पुरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में महामारी का रूप ले लिया है। इन महीनों में गोरखपुर और आसपास के सारे अस्पताल इस रोग के मरीजों से भरे रहते हैं। हर साल कई लोगों की खासकर बच्चों की मृत्यु भी हो जाती है। उत्तर प्रदेश के अलावे बिहार,झारखण्ड,उड़ीसा,पश्चिम बंगाल,असम,मेघालय,मणिपुर,कर्नाटक आँध्रप्रदेश,तमिलनाडु आदि राज्य भी इस बीमारी से प्रभावित हैं।
जापानी इंसेफ्लाइटिस का सबसे पहला केस दुनिया में जापानी एन्सेफलाइटिस का सबसे पहला केस जापान में सन 1871 में पाया गया। इसी कारण इसे जापानी एन्सेफलाइटिस या जापानी बुखार कहा जाता है। यह मुख्य रूप से चावल के खेतों में पनपने वाले मच्छरों  के जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस जो एक फ्लेविवायरस होता है से संक्रमित होने से होता है। ये मच्छर जब पालतू सूअर और पक्षियों को काटते हैं तो ये वायरस उनके शरीर के रक्त में चले जाते हैं जहाँ वे प…

Dengue: Lakshan, Upchar Aur Bachao Ke Upay

भारत में बारिश का मौसम शुरू होते ही कई तरह की बीमारियों  का आगमन शुरू हो जाता है पर एक बीमारी जो सबसे ज्यादा लोगों का नुकसान करती है वो है डेंगू। जुलाई से लेकर अक्टूबर के बीच में इसका कहर अपने चरम पर होता है। घर का घर बीमार रहता है। अस्पताल मरीजों से भरे रहते हैं। कईओं की तो  मौत हो जाती है। इसकी भयावहता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी चपेट में आने के बाद बचने  की उम्मीद छोड़ देते हैं लोग। हालाँकि इसका इलाज कारगर साबित नहीं होता तो भी इसके बारे में जानकारी रख कर इसका बचाव किया जा सकता है।

डेंगू क्या है

डेंगू एक तरह का बुखार होता है जो एक वायरस की वजह से फैलता है। यह वायरस मनुष्य में एडीज एजिप्टी नामक  मादा मच्छर के काटने से फैलता है। इसका वायरस फ्लाविविरिड फॅमिली के फ्लाविविरिस जेनस का होता है।  इस वायरस के शरीर में प्रवेश करने के कुछ समय के बाद ही तेज बुखार,बदन में दर्द आदि लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। इसे हड्डीतोड़ बुखार भी कहते हैं। इसके लक्षण आम बुखार की तरह होने से कई बार लोग इसे पहचान नहीं पाते और इलाज में देरी कर देते है जो जानलेवा साबित होती है। डेंगू के वायरस मच्छ…