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गलती : क्योंकि तुम औरत हो ........

उसने पहली गलती तब की थी जब वो छह साल की थी  कक्षा में प्रथम आ कर , भाई फेल हो गया था।  अतः उसकी पढाई  बंद करा दी गयी। 


दूसरी गलती उसने यों  कर दी कि जिद करके किसी तरह से दुबारा नाम लिखा के स्कुल तो जाने लगी  पर कुछ बरसों  बाद  उसने घर पर बताया की लड़के  स्कुल जाते समय फब्तियां कसते है।  नतीजा स्कुल फिर छुडवा  दिया गया।  

समय बिता अब उसकी शादी हो गयी थी।  उसे लगा की सब कुछ अब ठीक ठाक चलेगा पर यहाँ भी उससे एक गलती हो गयी  अपने साथ वो ढेर सारा दहेज़ नहीं ले गयी थी अतः  उसे घर से निकाल  दिया गया और वह मायके आ के बैठ गयी।  

इस बीच  माँ बाप मर गए और सारी जिम्मेवारी भाई भाभियों  की  हो गयी।  तभी एक गलती और हो गयी  जब उसने अपनी उल्टियों का राज बताया तो वो बड़े बाप का बेटा  निकला।  नतीजन उसे घर से निकाल  दिया गया। अब उसका जीवन उथल पुथल हो गया था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि  क्या करे।  तभी एक सभ्य  सी दिखने वाली महिला  ने साथ चलने को कहा तो बहुत सोच समझ के उसने हां कहा और उसके साथ चली गयी। 

लेकिन उसने तय कर लिया था की अब कोई गलती नहीं करनी है।   अब उसके जीवन में  ठहराव एवं  स्थायित्व आ गया था। 

कुछ बरस बी…

Meri Maa

आजखाने बैठा तो पत्नी ने बताया अचार खत्म हो गया है तब अचानक मुझे अहसास हुआ खाने में वह स्वाद ही नहीं है वही स्वाद जिसका मै बचपन से दीवाना था मुँह फीका हो गया। आज माँ को गए दो साल हो गए फिर भी उनके हाथो से बनाये हुए अचार आज तक खा रहा था। उनके हाथों में जादू था शायद इसीलिए दो सालों उनके हाथो के बने अचार का स्वाद लेता रहा। शायद मायें जानती है इसी लिए भरपूर अचार रहने के बावजूद वे हर साल इसे बनाती है।
दिखने में तो वह बहुत ही साधारण सी महिला थी पर पता नहीं क्यों मुझे वह दुनियां में वह सबसे खूबसूरत दीखती थी। उनका प्यार से सर पे हाथ फेरना, प्यार से गले लगाना थपकी देना मुझे लगता था जैसे संसार का सबसे किस्मत वाला प्राणी मै ही हूँ। मुझे अकसर लगता था कि माँ मुझे सबसे ज्यादा प्यार करती है पर बाद में मेरा यह भ्रम टूट गया जब मै देखा कि वह बहनो के लिए भी उतना ही रोती हैं।
लेकिन माँ का एक रूप और भी था। वह सख्त अनुशाशनप्रिय थीं। उनके सामने हम कोई भाई बहन गाली या कोई भी अपशब्द किसी को नहीं कह सकते थे। यहाँ तक उनके पीठ पीछे भी नहीं क्योंकि कोई न कोई चुगली कर देता था। पढाई के प्रति वह बड़ी ही सख्त थीं। मेरा अ…
Life

Life is hope

in childhood

Life is game

in teen

Life is enthusiasm

in youth

Life is responsibility

in fifties

Life is again a hope

till death