Skip to main content

Posts

Showing posts from December, 2019

ज़हर: एक मोटिवेशनल स्टोरी

निर्मला ये लो सामान, सुरेश ने घर में घुसते ही कहा। निर्मला दौड़ती हुई आयी और सामान लेते हुए कहा तुमसे बोली थी सब्ज़ी भी लाने को नहीं लिए क्या ? अरे बाबा पहले चैन से बैठने तो दो, सुरेश खाट पर बैठते हुए कहा। सब्ज़ी भी लाया हूँ ये लो। निर्मला सामान लेकर अंदर गयी और झट से सुरेश के लिए पानी ले आयी। आज बहुत थक गया हूँ , सुरेश खाट पर लेटते हुए कहा। बच्चे कहाँ हैं ? दोनों अभी खेल कर नहीं लौटे हैं। निर्मला ने चाय देते हुए कहा। निर्मला बैठकर सुरेश के पांव दबाने लगी। सुरेश टीवी देखने लगा।
सुरेश मजदूरी का काम करता था। शहर में काम की कमी नहीं थी। वह मेहनती भी था। अच्छा कमाता था और अच्छे से अपने परिवार का गुजारा करता था। घर में दो बच्चे थे। दोनों पढ़ते थे। वह अपने परिवार को खुश रखने में कोई कमी नहीं रखता था। जो भी कमाता था दिल खोल कर खर्च करता था।
कुल मिला कर उनका परिवार एकदम सुखी था।



एकदिन सुरेश मजदूरी करके वापस आ रहा था। उसी समय रस्ते में एक जनसभा हो रही थी। एक नेता जी बड़े ही जोश से भाषण दे रहे थे। वे लोगों का आह्वान कर रहे थे हम अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे। ईंट से ईंट बजा कर रख देंगे। सुरेश को उनका…