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Paris: Fashion City Of The World



पूरी दुनियां फैशन और ग्लैमर की नगरी के नाम से मशहूर पेरिस न केवल फ़्रांस का बल्कि पूरी दुनिया के महत्वपूर्ण शहरों में अपना स्थान रखता है। इसे सिटी ऑफ़ लाइट भी कहते हैं। यह फ्रांस की राजधानी है। सीन नदी के आगोश में समाया हुआ यह शहर अपनी कला, साहित्य, शिल्प और ग्लैमर के लिए विश्व विख्यात है। यह न केवल एक बड़ा व्यापारिक केंद्र है बल्कि शिक्षा का भी एक बहुत बड़ा केंद्र रहा है। यह फ़्रांसिसी क्रांति का एक महत्वपूर्ण केंद्र था।

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पेरिस सिटी : सिटी ऑफ़ लाइट 

पेरिस को सिटी ऑफ़ लाइट भी कहा जाता है क्योंकि यूरोप में सबसे पहले गैस स्ट्रीट लाइट की शुरुवात यहीं की गयी थी। सिटी ऑफ़ लाइट कहने के एक वजह यह भी है कि यहीं यूरोप का प्रथम विश्वविद्यालय खोला गया था।

पेरिस का इतिहास और आधुनिक पेरिस का निर्माण 

जहाँ तक पेरिस की स्थापना की कहानी है वह यह है कि तीसरी शताब्दी ईशा पूर्व में सेल्टिक लोगों के द्वारा इसे बसाया गया था। सेल्टिक लोगों को उन दिनों पारिसी कहा जाता था। इसे पहले लुटेटिया कहा जाता था। बारहवीं शताब्दी आते आते पेरिस पश्चिम का एक बड़ा व्यापारिक केंद्र बन चूका था। पेरिस को भव्य और आधुनिक बनाने का श्रेय नेपोलियन तृतीय को जाता है। साल 1800 के मध्य में, नेपोलियन तृतीय ने पेरिस के आधुनिकीकरण के लिए नागरिक योजनाकार जॉर्जी-यूजीन हॉउसमैन को किराए पर लिया था। नेपोलियन तृतीय नेपोलियन बोनापार्ट का भतीजा था। जब उसके हाथ में सत्ता आयी तो उसने पेरिस को एक बेहतरीन शहर में बदलने की योजना बनायीं। उसने हॉउसमैन को यह जिम्मेदारी सौंपी। हॉउसमैन ने शहर का कायाकल्प करने के लिए कई कड़े कदम उठाए। उसने शहर में स्थित सभी गरीब बस्तियों को उजाड़कर जबरदस्ती उन्हें शहर के बाहरी भागों में भेज दिया। अनियोजित तरीके से बने अमीरों को भी हटा दिया गया। उसके इन निर्णयों की काफी आलोचना भी हुई किन्तु हॉउसमैन  ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिर चौड़ी  चौड़ी सडकों का निर्माण किया गया, बड़े बड़े ब्लॉक्स और स्क्वायर, महंगे बाज़ारों तथा सुन्दर सुन्दर भव्य भवनों का निर्माण किया गया। शहर के निर्माण में हरियाली की कमी न हो इसका पूरा ध्यान रखा गया। इसके लिए जगह जगह बागीचों और पार्कों का निर्माण किया गया। जनता के विरोध और गालियों के बावजूद कार्य में कही से भी रुकावट नहीं आयी और फिर जब 17 सालों के बाद 1870 में पेरिस का निर्माण कार्य पूरा हुआ तो फ्रांस के साथ साथ पूरा यूरोप अपने आप पर गौरवान्वित महसूस करने लगा।  

पेरिस सिटी 
पेरिस फ़्रांस की राजधानी है। पुरे महानगरीय क्षेत्र की जनसँख्या लगभग बाइस लाख है। यहाँ मुख्य रूप से फ्रेंच बोली जाती है। यहाँ मुख्य रूप से क्रिश्चियन रोमन कैथोलिक धर्म के लोग रहते हैं।  सीन नदी इसके लगभग मध्य से होकर गुजरती है।

सीन नदी की वजह से पेरिस तीन मुख्य भागों में बंटा हुआ है :

1 The lie de la Cite : यह शहर का सबसे प्राचीन हिस्सा है। यह शहर का मध्य भाग है। यह पेरिस की धार्मिक गतिविधियों का केंद्र है।

2 Rive Gauche : यह पेरिस का सांस्कृतिक केंद्र है। यह सीन नदी के बायीं ओर स्थित है।


Rive Droite : यह हिस्सा सीन के दाहिने बाजू पर स्थित है। यह पेरिस की आर्थिक गतिविधियों का केंद्र है।

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लंग्स ऑफ़ पेरिस

पेरिस The Ile de France क्षेत्र के मध्य भाग में अवस्थित है। इस पुरे क्षेत्र से होकर  सीन, ओइसे और मार्ने नदियां बहती है जिनमे सबसे प्रमुख सीन नदी है। पूरा शहर बीच और ओक के जंगलों से घिरा हुआ है। ये जंगल शहर के प्रदुषण को काफी हद तक कम कर देते है। इसी वजह से  जंगलों को लंग्स ऑफ़ पेरिस यानी पेरिस के फेफड़े भी कहा जाता है। मुख्य शहर बहुत ज्यादा बड़ा नहीं है। नोट्रे डेम कैथेड्रल के सामने स्थित स्क्वायर से शहर का कोई भी क्षेत्र दस किलोमीटर से ज्यादा दूर नहीं है। 

लेफ्ट बैंक और राइट बैंक
पुरे पेरिस शहर को नागरिक प्रशासन की दृष्टि से 20 भागो में बांटा गया है जिन्हे अरोन्दिसेमेन्ट्स या क्वार्टर कहा जाता है। सीन नदी पेरिस में दक्षिण पूर्व से प्रवेश करती है और धीरे धीरे उत्तर की ओर मुड़ जाती है फिर यह आगे चल कर दक्षिण की ओर बहने लगती है। यह पेरिस में करीब 13 किलोमीटर बहती है और 20 अरोन्दिसेमेन्ट में से दस से  होकर गुजरती है। सीन के इस तरह के बहाव की वजह से लोगों ने ने इसके किनारे बेस क्षेत्रों को पूर्वी किनारा और पश्चिमी किनारा न कह कर लेफ्ट बैंक और राइट बैंक कहना शुरू कर दिया।

पेरिस : ए गार्डन सिटी 

नदी के वाटर लेवल से लेकर  सड़क मार्ग तक दोनों किनारों पर करीब तीस फ़ीट तक पेड़ों की क़तार लगायीं गयी है। ये पेड़ों और झाड़ियों की कतारें लगभग सभी जगहों पर हैं। सड़क से पानी की तरफ एक और पेड़ों की कतार भी बनायीं गयीं हैं और इन दोनों कतारों में मध्य एक दीवार है जो बड़े बड़े पत्थर के ब्लॉक् से बनी हुए है और इस दीवार को एक समय व्यापारिक जहाजों में प्रयोग होने वाले लोहे के छल्लों से सजाया गया है।

पेरिस में हरे भरे पेड़ों की भरमार है। सडकों के किनारे किनारे, सार्वजनिक पार्कों में, बागीचों और हर खुले स्थान में हज़ारों की संख्या में पेड़ लगाए गए हैं। अधिकांश पार्क और बागीचे पुराने शहर के बाहरी हिस्से में उन स्थानों पर लगाए गए हैं जो पहले के राजाओं के लिए छोड़े गए थे। पेरिस को गार्डन सिटी के रूप में विकसित करने का श्रेय नेपोलियन तृतीय को भी जाता है। नेपोलियन तृतीय अपने लन्दन प्रवास के दौरान वहां के पार्कों से काफी प्रभावित हुआ था। उसने पेरिस के दोनों ओर दो बड़े और सुन्दर पार्कों की स्थापना करायी। उसने दो प्राचीन मिलिट्री रिज़र्व क्षेत्रों को इंग्लिश पार्कों में परिवर्तित कराया। पश्चिम की ओर Bois De Boulogne और पूर्वी क्षेत्र में Bois De Vincennes इसके अलावा उसके शासन काल में पेरिस के बहुत सारे क्षेत्रों को हरे भरे क्षेत्रों में परिवर्तित किया गया। बीसवीं शताब्दी में मेयर जैक्विस सिराक़ के नेतृत्व में म्युनिसिपल शासन ने कई पार्कों की स्थापना करवाया। पार्कों की स्थापना और पेरिस को हरा भरा रखने का कार्य इक्क्सवीं शताब्दी में भी जारी है।

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प्रोमेनेड प्लांटी : एक खूबसूरत एलिवेटेड पार्क 

पेरिस में बारहवें अररोडिस्सेमेंट में प्रोमेनेड प्लांटी नाम का एक पार्कवे  बनाया गया है जो एक परित्यक्त रेल लाइन और पूल के किनारे किनारे सीन नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है। यह दुनिया का अपनी तरह का पहला एलिवेटेड पार्क है इसके साथ ही एक पूल पर बना विश्व का प्रथम ग्रीन स्पेस है। इसका प्रथम चरण 1994 में बन कर तैयार हुआ। इसके बाद ही कई अन्य शहरों में परित्यक्त रेल लाइनों को पार्क में परिवर्तित किया जाने लगा। पूरा पार्क करीब साढ़े चार किलोमीटर लम्बा है जो ओपेरा बेस्टाइल से बोइस दी विंसेंन्स तक फैला हुआ है। पेरिस का यह पूरा क्षेत्र बहुत ही खूबसूरत दीखता है। 

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पेरिस केटकॉम्बस: खोपड़ियों और हड्डियों का संग्रहालय 

तेरहवीं शताब्दी में रोमन शासन के दौरान पेरिस को समृद्धशाली शहर बनाने की योजना बनी। इसके लिए व्यापक निर्माणकार्य शुरू किये गए, सडकों, पुलों और इमारतें बनाने का काम जोरों शोरों से किया जाने लगा। इतने बड़े निर्माण कार्य के लिए काफी मात्रा में चूना और पत्थर की आवश्यकता थी। इसके लिए पेरिस के कुछ हिस्सों की खुदाई की गयी और इस वजह से इन हिस्सों में बड़ी बड़ी सुरंगें बन गयी। शहर निर्माण हो जाने के बाद धीरे धीरे लोग इन सुरंगों को भूल गए। किन्तु सत्रहवीं शताब्दी में शहर को एक बहुत ही बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा। पुरे शहर में प्लेग, अकाल और भुखमरी फैली हुई थी। लाखों की संख्या में लोग मरने लगे थे। मरने वालों की तादाद इतनी ज्यादा थी कि शहर के कब्रिस्तान कम पड़ने लगे थे। यहाँ तक कि पेरिस का सबसे बड़ा कब्रिस्तान लेस इनोकेन्ट्स भी पूरी तरह से भर गया था। एक समय ऐसा आया जब शवों को एक के ऊपर एक करके खुले में ही ऐसे ही छोड़ा जाने लगा। धीरे धीरे जब लाशें सड़ने लगी तो बदबू से लोगों का जीना दूभर हो गया। आखिरकार सरकार ने एक निर्णय लिया। सरकार ने सभी लाशों को उन सुरंगों में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया। हालाँकि शुरू में चर्च के द्वारा इसका विरोध हुआ किन्तु समस्या इतनी विकराल थी कि किसी के पास कोई विकल्प नहीं था। सुरंगों में एक के ऊपर एक लाशें रखी जाने लगी। एक अनुमान का अनुसार करीब 300 किलोमीटर में फैली इन सुरंगों में करीब साठ लाख लाशों को दफनाया गया। इसके बाद फ्रांस की क्रांति में भी मरने वालों को इन्हीं सुरंगों में दफनाया गया। इन सुरंगों को बाद में फ्रांस सरकार ने संग्रहालय में बदल दिया। इस संग्रहालय का नाम पेरिस केटकॉम्बस है। इस संग्रहालय को देखने के लिए हज़ारों पर्यटक आते हैं। लाखों हड्डियों और खोपड़ियों से भरे इस सुरंग रूपी संग्रहालय में घूमना अपने आप में एक अलग ही सिहरन और रोमांच का अनुभव देता है।
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एफिल टावर 

पुरे विश्व में पेरिस की पहचान का प्रतीक एफिल टावर पेरिस की धरोहर है। इस टावर का निर्माण फ्रान्स की महान क्रांति के सौ वर्ष पुरे होने के उपलक्ष्य में विश्व व्यापार मेले के समय बनवाया गया था। एफिल टावर का निर्माण प्रख्यात इंजीनियर अलेक्जेंडर गुस्ताव एफिल और उनकी टीम के द्वारा किया गया था। इस टावर का निर्माण 31 मार्च 1889 को पूर्ण हुआ था।

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इस टावर में लगे लोहे का वजन दस हज़ार टन है और यह 324 मीटर ऊँचा है। किसी ज़माने में यह दुनिया का सबसे ऊँचा मानव निर्मित निर्माण था। इस टावर में 11665 सीढियाँ हैं। सीढ़ियों के अलावा इसमें लिफ्ट भी लगे हैं। टावर पर तीसरे तल तक दर्शकों को जाने की इज़ाज़त है।  फर्स्ट और सेकंड फ्लोर पर  लिए रेस्टॉरेंट भी बने हुए हैं। यह टावर पेरिस की एक धरोहर है। इसे देखने के लिए पूरी दुनिया से लाखों लोग प्रतिवर्ष आते हैं। इस पुरे टावर पर लाइट लगी हुई है। रात में जब इसमें लगे 20 हज़ार लाइट को जलाया जाता है तब इसकी खूबसूरती देखने लायक होती है। इस टावर का प्रयोग टीवी और रेडियो प्रसारण में भी किया जाता है। इस टावर पर इसको बनाने वाले सभी इंजीनियरों और वास्तुविदों का नाम खुदा हुआ है। इस टावर को हर सातवें साल में पेण्ट किया जाता है। इस पेंटिंग में करीब साठ टन पेण्ट लगता है। 
आर्क डे ट्रिओफ़े 
यह एक विशाल और बहुत ही भब्य द्वार है। नेपोलियन ने अपने सैनिकों की जीत के उपलक्ष्य में इस विशाल द्वार को बनवाने का आदेश दिया था। यह घटना 1806 की है। काम तो शुरू हुआ परन्तु कुछ वजह से इस कार्य को अधूरे पर ही छोड़ दिया गया। 1821 में नेपोलियन की मृत्यु हो जाने से उसकी यह इच्छा अधूरी ही रह गयी। बाद में इसे 1836 में पूर्ण किया गया। यह गेट रोमन वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है। इस गेट को 1806 में जीन कैलग्रीन ने डिज़ाइन किया था। इसकी दीवारों पर युद्ध में शहीद सैनिकों के नाम लिखे हुए हैं। नीचे एक तहखाना बना हुआ है जिसे अनजाने सैनिक का मकबरा कहते हैं। यह प्रथम विश्वयुद्ध में मारे गए सैनिकों को भी समर्पित है। 

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रेवोलुशन स्क्वायर या प्लेस डे रेवोल्यू सन  

रेवोलुशन स्क्वायर एक भव्य स्मारक है। इसका निर्माण फ़्रांसिसी क्रांति की याद में किया गया था। इसी स्थान पर फ्रांस के सम्राट लुई सोलह और उसकी साम्राज्ञी को वर्साईल के महल से लाकर गिलोटिन पर चढ़ा कर हत्या कर दी गयी थी।  


वर्सायल पैलेस

वर्सायल पैलेस अपनी अद्वितीय वास्तुकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। इसकी विशालता और कलात्मकता किसी को भी अचंभित कर देता है। यह महल अपनी विलासिता के लिए भी मशहूर है।  यह विशालकाय महल अपनी अदभुत  कलाकृतियों के लिए भी जाना जाता है। इस महल का निर्माण लुई चौदहवें ने करवाया था।

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डिज्नीलैंड पार्क

करीब 4800 एकड़ में फैला यह पार्क मूल रूप से डिज्नी के चरित्रों और फिल्मों की थीम पर बना हुआ है।  विशाल पार्क शहर के मध्य भाग से 32 किलोमीटर पूरब में स्थित है। यह पार्क 1992 में चालू हुआ। 2002 में इसके साथ ही डिज्नी स्टूडियो  निर्माण किया गया। इन पार्कों में 57 झूले और राइड्स आदि हैं। इस पुरे पार्क के पांच भाग हैं मेन स्ट्रीट यूएसए,फैंटेंसीलैंड, एडवेंचर लैंड, फ़्रंटीयरलैण्ड और डिस्कवरीलैण्ड। एक भाग से दूसरे भाग तक पैदल जाया जा सकता है। इसके अलावा हर भाग में ट्रैन द्वारा भी पंहुचा जा सकता है। इस पुरे पार्क में कई रिसोर्ट,होटल, रेस्टोरेंट और शॉपिंग सेंटर हैं। इन सब के अलावे इसमें एक गोल्फ कोर्स भी है। ऐलिस इन वंडरलैंड, पाइरेट्स, स्नोवाइट, पीटर पैन, टॉय स्टोरी आदि से सुजज्जित यह पार्क सचमुच एक कल्पनालोक की तरह दीखता है। यहीं पर स्लीपिंग ब्यूटी का महल है जिसमे जाने पर ऐसा महसूस होगा जैसे आप भी उन चरित्रों की दुनिया में शामिल हैं। यह डिज्नीलैंड पार्क हमेशा पर्यटकों से भरा हुआ रहता है।

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वैक्स म्यूजियम

पेरिस को म्यूजियमों का शहर बोला जाय तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। यहाँ एक से बढ़कर एक म्यूजियम हैं। इन्ही म्यूजियमों में एक है वैक्स म्यूजियम। यह अपने आप में बहुत ही अनोखा म्यूजियम है। इसे लन्दन के मैडम तुसाद के वैक्स म्यूजियम की तर्ज पर बनाया गया है। इसमें संसार के अनेक महापुरुषों और मशहूर लोगों की मोम की बनी मूर्तियां रखी गयी हैं। 
नोत्रे डेम कैथेड्रल
फ्रेंच गोथिक शैली में बना यह कैथोलिक चर्च पूरी दुनिया के सबसे मशहूर चर्चों में से एक है। नेपोलियन बोनापार्ट के राज्याभिषेक से लेकर कई अन्य ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा यह चर्च  अपनी खूबसूरती और भब्यता के लिए भी जाना जाता है। इस चर्च में जीसस क्राइस्ट के क्रॉस का एक छोटा हिस्सा क्राउन ऑफ़ थोर्न तथा उसके कुछ अन्य स्मृति चिह्न भी मौजूद हैं। इसमें दस बड़े घंटे हैं जिनमे से इमेनुअल नामक घंटा सबसे भारी है यह 13 टन से भी ज्यादा भारी है।
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लूव्र म्यूजियम

पेरिस नगर के पश्चिम में  नदी के दाहिने तट पर स्थित लूव्र म्यूजियम दुनिया के सबसे बड़े म्यूजियम में से एक है।  वास्तव में यह एक किला था जिसका निर्माण 12 वीं  शताब्दी में फिलिप द्वितीय ने कराया था।  कालांतर में यह कई राजाओं का निवास स्थान बना। 10 अगस्त 1793 को पहली बार इसे म्यूजियम का रूप दिया गया। उस समय इसमें 537 पेंटिंग्स और 184 कलाकृतियां रखी गयी। थी। इस म्यूजियम  क्षेत्रफल लगभग 60600 वर्ग मीटर है। विश्व प्रसिद्ध पेंटिंग मोनालिसा इसी म्यूजियम में रखी गयी है। इसके अलावे इसमें हम्मूराबी की आचारसंहिता, वर्जिन ऑफ़ द  रॉक्स जैसी अनेक ऐतिहासिक चीज़ें रखी गयी हैं।  इस म्यूजियम के ठीक सामने कांच का एक पिरामिड बना हुआ है। इस पिरामिड की वजह से इस संग्रहालय की खूबसूरती और भी बढ़ जाती है।

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लैस इनवैलिड्स

यह वास्तव में कुछ म्यूजियमों और अन्य दूसरी इमारतों का एक समूह है। इसका निर्माण सत्रहवीं शताब्दी में लुई चौदहवें के द्वारा युद्ध में घायल सैनिकों के इलाज के लिए तथा अपाहिज और बूढ़े सैनिकों और उनके परिवार को आश्रय देने के लिए किया गया था। यहाँ पर सैनिकों को सारी सुविधाएँ जैसे खाना पीना, दवा,  रहना  आदि मुफ्त में दी जाती थी। यहाँ कई सैनिकों की कब्रे भी बनी हुई हैं।

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