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पारस पत्थर : ए मोटिवेशनल स्टोरी


पारस पत्थर : ए मोटिवेशनल स्टोरी 

सोहन आज एक नयी एलईडी टीवी खरीद कर लाया था। टीवी को इनस्टॉल करने वाले मेकैनिक भी साथ आये थे। मैकेनिक कमरे में टीवी को इनस्टॉल कर रहे थे। तभी सोहन की बीबी उनके लिए चाय बना कर ले आयी। दोनों मैकेनिकों ने जल्दी ही अपना काम ख़तम कर दिया। सोहन नयी टीवी के साथ नया टाटा स्काई का कनेक्शन भी लिया था। चाय पीते पीते उन्होंने टीवी को चालू भी कर दिया था। उसी समय सोहन का पडोसी रामलाल भी आ गया। नयी टीवी लिए हो क्या ? उसने घर में घुसते ही पूछा।  हाँ लिया हूँ।  सोहन ने जवाब दिया। कित्ते की पड़ी ? यही कोई चौदह हज़ार की। हूँ बड़ी महँगी है। राम लाल ने मुंह बनाते हुए कहा। सोहन ने कहा मंहंगी तो है लेकिन क्या करें कौन सारा पैसा लेकर ऊपर जाना है। सोहन ने राम लाल को भी चाय पिलायी। चाय पीने के बाद राम लाल चला गया। सोहन अपने परिवार के साथ बैठ कर टीवी का आनंद लेने लगा।

इंसान अपने दुःख से उतना दुखी नहीं होता जितना दूसरे के सुख को देख कर

सोहन लकड़ी का काम किया करता था। खूब मेहनती था। अच्छा कारीगर था अतः उसके पास काम भी खूब आते थे।रात में अकसर दस बारह बजे तक वह काम किया करता था। इसी मेहनत का नतीज़ा था कि वह अच्छा पैसा कमाता था। उसका परिवार बहुत खुशहाल था। उसकी बीबी और बच्चे भी अकसर उसके कामों में हाथ बंटाया करते थे। सोहन हर साल दिवाली में घर का कुछ न कुछ सामान खरीदता रहता था। बहुत दिनों से उसका मन एलईडी टीवी खरीदने का हो रहा था सो इस दिवाली में उसने इसे खरीद ही लिया। 


काम में व्यस्त रहने की वजह से सोहन अकसर मोहल्ले वालों से कम ही मिल पाता था। इसी वजह से अकसर लोग उसे घमंडी भी कहा करते थे। कहते हैं इंसान अपने दुःख से उतना दुखी नहीं होता जितना दूसरे के सुख को देख कर। यही हाल मोहल्ले वालों का था। मोहल्ले वाले सोहन के खुशहाल परिवार को देख कर जलते थे। उन्हें लगता था सोहन के पास कोई राज जरूर है जिससे उसके घर धन बरसता है। कुछ लोग सोंचते थे सोहन की किस्मत ही  अच्छी है जो वह इतनी कमाई कर लेता है। यही हाल सोहन के पडोसी राम लाल का था। वह दिन रात अपनी किस्मत को कोसता रहता था। वह अकसर सोहन के घर में ताक झाँक किया करता था ताकि उसे उसके इतने खुशहाल होने का राज पता चल सके। एक दिन राम लाल सोहन के घर के बगल से गुजर रहा था तभी उसके कानों में आवाज आयी, सोहन अपने बच्चों को समझा रहा था देखो बच्चो यह पारस पत्थर है इस पर जितना लोहा घीसोगे उतना ही सोना तुम पाओगे, राम लाल के कानों में मानों किसी ने खौलता हुआ तेल डाल  दिया हो,उसे बहुत ही दुःख हुआ। वह अपने भाग्य पर फिर कोसने लगा। उसे सोहन के सुख और अपने दुःख का कारण पता चल गया था। धीरे धीरे यह बात मोहल्ले वालों को पता चली। अब मोहल्ले वालों के दुःख और भी बढ़ गए।इधर इन सब बातों से निश्चिन्त सोहन दिन रात अपने काम में लगा रहता था। सोहन ने अब स्कूटी भी ले लिया था।  इससे उसका अच्छा खासा समय बच जाता था। इसी बीच कारोबार में मंदा आ गया। सारे कारीगर काम के बिना बैठ गए। सोहन  के काम पर भी असर हुआ था किन्तु उसने काम कम नहीं किया।  वह एडवांस में बेड  और सोफे बना बना कर रखने लगा। उसे काम करते हुए देखकर मोहल्ले वाले उसे पागल समझते थे। कुछ समझते थे कि पारस पत्थर की वजह से ही उसपर मंदे  का कोई असर नहीं हुआ है। किन्तु सचाई तो सोहन को पता थी। धीरे धीरे कई महीने बीत गए। अब मार्किट में तेज़ी आ रही थी। बाजार में पहले की तरह रौनक और चहल पहल होने लगी। बाजार चल निकला तो सामान की डिमांड भी बढ़ गयी। अब चुकि सोहन के पास पहले के बनाये हुए फर्नीचर का अच्छा खासा स्टॉक था, उसकी चांदी हो गयी। उसकी दुकान पर रोज़ ग्राहकों का तांता  लगा रहता था। थोड़े ही दिनों में उसने अच्छे खासे पैसे कमा लिए। उसकी दुकान पर भीड़ देखकर मोहल्ले वालों को यकीन हो गया था कि सोहन के पास न केवल पारस पत्थर है बल्कि वह कोई जादू भी जानता है जिससे सारे ग्राहक उसकी ही दुकान पर खींचे चले जाते हैं। राम लाल के कलेजे पर तो मानो सांप लोट रहा हो वह बहुत दुखी था।  हर वक्त अपने भाग्य को कोसता  था। निराश होकर एक दिन उसने सोहन के पारस पत्थर को चोरी करने की सोची। एक रोज़ सोहन अपने परिवार  के साथ शादी में कही गया हुआ था। उसी रोज़ राम लाल सोहन के घर में  ताला तोड़ कर घुसा। उसने घर में काफी खोजा  किन्तु उसे कही पारस पत्थर नहीं मिला। थक हार कर वह वापस चला आया। अगले दिन सोहन जब घर आया तो अपने घर का हाल देखकर उसके होश उड़ गए। वह जल्दी से घर के अंदर गया। उसने देखा उसका सारा सामान बिखरा हुआ है। जल्दी जल्दी सोहन ने अपना सारा सामान मिलाया। सामान मिलाने के बाद उसे बड़ी राहत  मिली। उसका कोई सामान चोरी नहीं हुआ था। उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कौन ऐसा चोर है जो घर में घुस कर भी कोई सामान नहीं चुराया। धीरे धीरे इस घटना के कई महीने बीत गये और सब कुछ सामान्य हो गया। फिर एक दिन सोहन की अनुपस्थिति में इसी तरह की घटना उसके घर हो गयी। चोर आया, सारा सामान बिखराया और फिर चलता बना। सोहन की कुछ समझ नहीं आ रहा था कि कौन ऐसा चोर है जो आता है और फिर बिना चोरी किये चला जाता है।  अब सोहन काफी सतर्क रहने लगा। अब वह कही बाहर भी जाता था तो घर अकेले नहीं छोड़ता था कोई न कोई घर पर जरूर रहता था। कई महीने बीत गए। एक दिन सोहन की बीबी बच्चों के साथ  मायके गयी हुई थी। सोहन को उन्हें बुलाने वहां जाना था। वह शाम को निकला ट्रैन पकड़ने के लिए। किन्तु जब वह स्टेशन पंहुचा तो देखा ट्रैन जा चुकी थी। चुकि रात में कोई अन्य ट्रैन नहीं थी, वह घर वापस आ गया। घर में घुसते ही उसे कुछ आभास हुआ। वह धीरे धीरे घर में घुसा और अंदाज से ही उस चोर को पकड़ लिया। चोर को पकड़ कर वह वही उसे पीटना शुरू कर दिया और फिर एक हाथ से लाइट जलायी। घर में रौशनी होते ही उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा। राम लाल तू ? तो तुम ही वो चोर हो जो मेरे घर में बार बार चोरी करने घुसते हो। राम लाल सोहन के पैरों में गिर गया। उसने कहा मुझे माफ़ कर दो सोहन भैया। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गयी है। अब तक कमरे में बहुत लोग जमा हो गए थे। सोहन ने उससे पूछा आखिर तुम चोरी करने घुसते थे तो कुछ चुराए क्यों नहीं? राम लाल ने रोते  हुए कहा भईया मै तुम्हारे पारस पत्थर को चुराना चाहता था। नहीं मिलने पर हर बार वापस हो जाता था।  पारस पत्थर कौन सा पारस पत्थर ? मेरे पास तो कोई पारस पत्थर नहीं है। वही पारस पत्थर जिस पर तुम लोहा घीस कर सोना बनाते हो। राम लाल ने उस दिन की सुनी हुई पूरी बात सोहन को बतायी। यह सुन कर सोहन हँस पड़ा। उसने कहा तुम्हे पारस पत्थर चाहिए? तो यह लो। उसने सामने रखे हुए औज़ारों को तेज़ करने वाले पत्थर को हाथ में लेकर उसके हाथ पर रख दिया और बोला देखो यही है हमारा, हम कारीगरों का पारस पत्थर। इस पर तुम जितना अपने औजारों को रगड़कर तेज़ बनाओगे उतना ही तुम अच्छा और ज्यादा काम करोगे। और तुम जितना अच्छा और ज्यादा काम करोगे उतना ही पैसा तुम्हारे घर आएगा। अब उस पैसे से तुम सोना खरीदो या चांदी या फिर कोई सामान। तो फिर हुआ न यह पारस पत्थर। तुमने उस दिन छुपकर हमारी बाते तो सुन ली किन्तु बातों के पीछे छिपे आशय को समझ नहीं पाये। देखो राम लाल यह सब कड़ी परिश्रम से हासिल किया जाता है  कोई पत्थर या जादू तुम्हे कुछ नहीं दे सकता है। राम लाल को सोहन की बातों का मतलब अब समझ आ रहा था। उसे समझ आ रहा था कि कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। और अच्छी किस्मत, बुरी किस्मत, पारस पत्थर, जादू सब बेकार की बाते हैं। 


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