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ऐसा धन जिसे कोई चुरा नहीं सकता



मोटिवेशनल स्टोरी 

"पापा पापा, बाबू ने मेरी ड्राइंग की कॉपी फाड़ दी है " बेटी ने रोते हुए शिकायत किया। "देखिए न, मैंने कितना कुछ बनाया था।" उसने फटे हुए पन्नो को जोड़ते हुए दिखाया। मैंने उसे चुप कराने की कोशिश की तो वह और भी ज्यादा रोने लगी। मैंने कहा अच्छा ठीक है चलो मै तुम्हे दूसरी कॉपी दिला दे रहा हूँ। मै कान्हा को बुलाया और खूब डांटा तो वह भी रोने लगा और बोला "दीदी मुझे कलर वाली पेंसिल नहीं दे रही थी।" अब दोनों रो रहे थे।  मैंने दोनों को समझाया। कान्हा तो चुप हो गया किन्तु इशू रोए जा रही थी। "मैंने इतने अच्छे अच्छे ड्राइंग बनाये थे , सब के सब फट गए।" वास्तव में इशू की रूचि ड्राइंग में कुछ ज्यादा ही थी। जो भी देखती उसे अपने ड्राइंग बुक में बना डालती, कलर करती और संजो कर रख लेती। मै उसको समझाने लगा देखो बेटी फिर से बना लेना, उसने कॉपी फाड़ी है किन्तु तुम्हारे हुनर को कोई नहीं छीन सकता। हुनर या टैलेंट ऐसी चीज़ है जिसे कोई नष्ट नहीं कर सकता। वह मेरे पास आकर बैठ गयी, मै उसके सर पर हाथ फेरने लगा वह अब रो नहीं रही थी किन्तु सुबक रही थी। मैंने उसे एक कहानी सुनानी शुरू की। वह जब भी रोती थी तो उसे चुप कराने के लिए मुझे कोई न कोई कहानी कहनी पड़ती थी।



एक समय की बात है। एक बहुत धनी  व्यापारी था। उसके दो लड़के थे। दोनों की पढाई लिखाई पूरी हो चुकी थी। व्यापारी अपने दोनों बच्चों को बहुत प्यार करता था। दोनों बच्चे भी अपने पिता से उतना ही प्यार करते थे। कई वर्षों के बाद एक समय जब उस व्यापारी को अहसास हुआ कि वह अब बूढ़ा हो गया है अब उससे ज्यादा कुछ नहीं नहीं हो पा रहा है तब उसने अपने पुत्रों में से किसी एक को अपने व्यापार का उत्तराधिकारी बनाने का निर्णय लिया। अब उसके सामने सवाल था कि वह अपने किस बेटे को यह जिम्मेदारी सौंपे। काफी सोच विचार किया फिर भी उसे कुछ समझ नहीं आया। आखिर में उसने एक उपाय सोचा। उसने अपने दोनों पुत्रों को बुलाया। दोनों पुत्र आये। उसने दोनों से कहा मैंने अपने जीवन में बहुत कुछ कमाया, अब मै बूढ़ा हो गया हूँ। काम करने की अब ज्यादा ताकत नहीं है मेरे अंदर। मै अब कुछ दिनों में रिटायर होना चाहता हूँ। दोनों पुत्रों ने कहा आप निश्चिन्त होकर रिटायर हो जाएये पिताजी, हम आपका बिजिनेस संभाल लेंगे। व्यापारी ने कहा मै जानता हूँ तुम दोनों मेरे बिजिनेस को संभाल लोगे लेकिन मै अपने पुरे बिजिनेस की कमान किसे दूँ यह मेरे समझ नहीं आ रहा है। मेरा उद्देश्य केवल बिजिनेस संभालना नहीं बल्कि उसे काफी आगे तक ले जाना है। दोनों पुत्रों ने कहा पिताजी आप जिसे उचित समझें उसे आप अपने व्यवसाय का उत्तराधिकारी बना दें हमें कोई दुःख नहीं होगा। इस पर व्यापारी ने कहा मै अपना उत्तराधिकारी उसी पुत्र को बनाऊंगा जो आज से ठीक एक साल बाद जो मेरे पास अधिक ज्ञान और दौलत के साथ वापस आएगा। इसके लिए तुम दोनों पुत्र को एक एक लाख रुपये भी मै दूंगा। दोनों पुत्र तैयार हो गए। पिताजी ने उन्हें अपने वायदे के अनुसार एक एक लाख रुपये दे दिए।  दोनों पुत्र अलग अलग दिशाओं में चल पड़े। दोनों पुत्र अलग अलग शहरों में रहने लगे। बड़े पुत्र ने अपने रुपयों को व्यापार में लगा दिया और उसी में व्यस्त हो गया जबकि छोटे पुत्र ने उन पैसों को बैंक में जमा करा दिया और उस शहर के एक बहुत ही बड़े व्यवसाई के यहाँ नौकरी कर ली। वह व्यवसायी के यहाँ रह कर उसके व्यवसाय की बारीकियों को सिखने लगा। धीरे धीरे वह व्यापार के हर पहलु को सीख गया। उसे बाज़ार का पूरा अनुभव हो गया। व्यवसायी कहाँ से अपना माल खरीद रहा है कब खरीद रहा है और कहाँ बेच रहा है, उसे सारी बातो का काफी अच्छा तजुर्बा हो गया। बाजार के उतार चढ़ाव पर भी वह अपनी पैनी नज़र रखने लगा। धीरे धीरे  उसे कई महीने हो गए। अब वह अपने पैसे से व्यापार करने लगा। उसका व्यापार चल निकला और जल्दी ही वह बहुत सारे पैसे कमा लिया। उधर बड़े लड़के को व्यवसाय का अनुभव न होने के कारण काफी नुकसान हो गया। वह कभी एक बिजिनेस करता तो कभी दूसरा। धीरे धीरे उसकी सारी पूंजी ख़त्म हो गयी। धीरे धीरे पूरा एक साल निकल गया। ठीक एक साल बाद दोनों भाई नियत स्थान पर मिले।  दोनों में बहुत अंतर आ गया था।
दोनों एक दूसरे के गले मिले और आप बीती सुनाई। इसके बाद दोनों भाई अपने पिता से मिलने घर को निकले। दोनों के पास धन देखकर कुछ चोर उनके पीछे लग गए। मौका मिलते ही चोरों ने उनका सारा माल साफ़ कर दिया। दोनों भाई बहुत ही दुखी हुए। जब वे घर पहुंचे तो उनके पास कुछ भी नहीं था। दोनों अपने पिता  से मिले और पूरी बात बताई। व्यापारी ने कहा चलो कोई बात नहीं , तुम दोनों सुरक्षित आ गए यही मेरे लिए बड़ी बात है। एक काम करो तुम दोनों को यहीं किसी दूसरे व्यवसायी के यहाँ मै काम पर रखवा देता हूँ। तुम दोनों वहां एक वर्ष व्यतीत करो फिर मै अपना फैसला लूंगा। उसने अपने मित्र के व्यवसाय में दोनों लड़कों को काम पर लगवा दिया। दोनों लड़के वहां काम करने लगे। चुकि छोटे लड़के के पास व्यवसाय का बहुत सारा अनुभव था अतः  उसने जल्द ही अपनी मेहनत और सूझ बुझ की बदौलत सबका दिल जीत लिया और अपने फर्म को ऊंचाइयों तक ले गया। वहीँ बड़ा लड़का अनुभव न होने से केवल अपनी नौकरी बजाता था। एक दिन उसके पिता ने अपने छोटे लड़के को बुलाया और कहा देखो बेटा ज्ञान का धन ऐसा धन है जिसे न तो कोई चुरा सकता है न कोई नष्ट कर सकता है। तुमने अपने एक साल के समय को ज्ञान और अनुभव प्राप्त करने में लगाया जिसकी वजह से तुम्हारे धन की चोरी होने के बावजूद तुम आज धनार्जन कर रहे हो और तुम्हे सफलता मिल रही है। वही तुम्हारा भाई ज्ञान और अनुभव न हासिल करके केवल अपनी जीविका चलाने में रहा इसलिए उसे वह सफलता नहीं मिल सकी। अतः मै तुम्हे अपने व्यवसाय का उत्तराधिकारी बनाता हूँ।  छोटे भाई ने अपने पिता के पैर स्पर्श कर आशीर्वाद लिए और कहा पिता जी आप सच कह रहे हैं। मेरा धन चोरी हो जाने पर मै निराश हो गया था किन्तु मेरे अनुभव ने मुझे आत्मविश्वास दिया और मै फिर उनका प्रयोग करके इस सफलता को हासिल कर पाया  हूँ।  सच ही कहा है आपने ज्ञान और अनुभव को न तो चोरी किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है।
कहानी सुनते सुनते इशू की आँखों में फिर से चमक आ चुकी थी। उसने फिर से अपनी ड्राइंग बुक को उठाया और ड्राइंग बनाने बैठ गयी। मुझे उसकी आँखों में आत्मविश्वास दीख रहा था।
                                                                                       

                                                                                         अखिलेश  शर्मा 
                                                                    https://www.saansthelife.com/2019/01/blog-post.html



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