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10 Upay Jo Aapke Drishtikon Ya Nazariye Ko Badal Ke Rakh Degi

एक बार एक जूते बनाने की कंपनी ने अपना बिजिनेस बढ़ाने के लिए कई देशों का सर्वे कराया। इसी क्रम में कंपनी ने अपने बन्दे को बिजिनेस की संभावनाओं का पता लगाने के लिए एक देश भेजा। बन्दे ने वहां जाकर देखा तो उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा। उसने देखा उस देश में कोई जूता तो जूता चप्पल तक नहीं पहनता । उसने तुरत कंपनी को अपनी रिपोर्ट भेजी। उसने अपने पत्र में लिखा यहाँ पर कंपनी अपना कोई ब्रांच न खोले यहाँ पर उनका बिजिनेस नहीं चल पायेगा क्योंकि जूते की यहाँ कोई डिमांड नहीं है। कुछ समय के लिए कंपनी अपना बिजिनेस विस्तार का प्लान स्थगित कर दिया। कुछ सालों पश्चात कंपनी ने फिर अपने बिजिनेस विस्तार हेतु उसी देश में एक दूसरे बन्दे को भेजा। दूसरा बन्दा वहां पंहुचा उसके भी आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब उसने देखा उस देश में किसी के पास चप्पल तक नहीं था। लोग बड़े कष्ट से रास्ते पर चल रहे थे।उसने तुरंत कंपनी में अपनी रिपोर्ट भेजी यह जगह आपके बिजिनेस के लिए बहुत ही उपयुक्त है यहाँ पर आप  अपनी बड़ी से बड़ी प्रोडक्शन फैक्ट्री लगा सकते हैं यहाँ पर  हर एक घर में जूते की जरुरत है यहाँ एक बार प्रचार हो जाने के बाद जूते की इतनी डिमांड होगी कि उसको पूरा करना मुश्किल होगा क्योंकि यहाँ किसी के पास जूते नहीं है। कंपनी ने अपनी फैक्ट्री डाली और उसकी बात सच निकली। जूते की इतनी डिमांड हो गयी कि कंपनी उसे पूरा कर नहीं पा रही थी।
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परिस्थितियां दोनों ने एक सी देखी। अवसर दोनों के पास एक से थे। एक को वहां कोई संभावना ही नहीं दीख रही थी वही दूसरे को वहाँ उसके उलट बहुत बड़ी संभावना  दिखी।  अंतर क्या था दोनों में तो बस नज़रिये का। मतलब साफ़ है परिस्थितियों को आप कैसे लेते हैं यह आपके नज़रिये पर डिपेंड करता है। उन्ही परिस्थितियों में  किसी को निराशा दीखती है तो किसी को अवसर। जाहिर है अवसर आपको कामयाबी को ओर ले जाती है। अतः हमें अपने सोचने के तरीके पर सोचना होगा। क्या हम किसी परिस्थिति का सही विश्लेषण कर रहे हैं  क्या हम गिलास के आधे खाली भाग को देख रहे हैं या आधे भरे भाग को देख रहे हैं। कहते हैं हर समस्या के पीछे कोई न कोई समाधान छिपा रहता है अब नज़रिये की बात है कि हमें समस्या दीखती है या समाधान। आप दुनिया के किसी भी व्यावसाय पर गौर करेंगे आप देखेंगे उनकी उत्पत्ति किसी समस्या के उपरांत ही हुई। एक और सिचुएशन है डोर तो डोर मार्केटिंग के दो बन्दे तैयार हो कर अपने अपने टेरिटरी में निकलने वाले थे लेकिन सुबह से रुक रुक कर बारिश हो रही थी एक बन्दे ने कहा बहुत दिक्कत हो गयी सारा दिन खराब हो गया। इस मौसम में कैसे निकला जाय। आज तो बोहनी भी नहीं होगी। लेकिन दूसरा बन्दा बड़ा खुश था। उसने सोचा आज बड़ा ही अच्छा दिन है सारे लोग बारिश की वजह से अपने अपने घर पर ही होंगे , आज बिक्री के चांस ज्यादा मिलेंगे। वह निकला और सच में शाम तक अच्छी सेल कर चूका था।
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बात एक दम क्लियर है आप परिस्थितियों को किस प्रकार से लेते हैं आपका देखने का नजरिया कैसा है। किसी भी सफल व्यक्ति को आप देखेंगे तो आप पाएंगे कि उसमे और एक सामान्य व्यक्ति में क्या अंतर है तो बस नज़रिये का।  एक सफल व्यक्ति उसी परिस्थिति में उम्मीद की किरण देखता है जबकि एक असफल व्यक्ति को उस परिस्थिति परेशानिया दीखती हैं। अब यही दृष्टिकोण उसे रास्ते  दिखायेगा या रुकावटे दिखायेगा। जहाँ पॉजिटिव दृष्टिकोण उसका उत्साह बढ़ाता है और यह उत्साह उसके आत्मबल यानि सेल्फ कॉन्फिडेंस को बढ़ाता है जो कि सफलता के लिए अति आवश्यक है वहीँ नेगेटिव दृष्टिकोण उसे हतोत्साहित करता है और थोड़ी सी परेशानी में वह पीछे हट जाता है। कई बार निगेटिव दृष्टिकोण उसे काम की शुरुवात ही नहीं करने देता है। हमारा नजरिया यानि दृष्टिकोण हमारी सोच पर निर्भर करता है हम कैसे माहौल में बड़े हुए हैं, माँ की सोच कैसी थी,  समाज कैसा है हम क्या पढ़ते हैं हम कैसे लोगों की संगत में रहते हैं। हम अपने माहौल, समाज और बहुत सी चीज़ों को तो बदल नहीं सकते हैं किन्तु हम अपने अध्ययन पर अपना नियंत्रण रख सकते हैं  साथ ही हमारी संगत में कौन कौन रहेगा इसका चुनाव हम कर सकते हैं। 
हर रात के बाद सुबह होती है और नदी का एक किनारा होता है अतः निराश होने की जरुरत नहीं है। सोच को व्यापक, सकारात्मक और आशावादी  रखना सफल होने के लिए आवश्यक है। एक सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति हर समस्या में हल देखता है जबकि नकरत्मक् सोच वाले व्यक्ति को समाधान में भी समस्या नज़र आती है। सकारात्मक सोच वाले कुछ व्यक्ति जन्मजात होते हैं लेकिन इसको भी जन्मजात कहना उचित नहीं होगा। ऐसे लोगों पर अपने परिवार , समाज और वातावरण का भी असर होता है। जैसा पारिवारिक वातावरण या परिवार की सोच होगी समाज जैसा होगा व्यक्ति वैसा ही सोचने लगता है। पर कई बार लोग बहुत ही भिन्न माहौल में पले बढे होते हैं। उनके पालन पोषण का असर उनकी सोच पर भी पाया जाता है। ऐसी स्थिति में हमें अपने आप का परिक्षण करना चाहिए और अपने नज़रिये की पहचान करनी चाहिए। हमारी सोच सकारात्मक है या नहीं इसका पता लगाना चाहिए। हमारा दृषिकोण किसी भी समस्या को लेकर कैसा है इसका पता लगाना बहुत कठिन काम नहीं है। इसके लिए हम हाल में गुज़री हुई कुछ समस्याओं को ले सकते हैं। उन समस्याओं के प्रति हमारी सोच क्या थी समस्या को देखते ही हमारे मुख से क्या निकला, समस्या के समाधान के प्रति हमारी सोच क्या थी इस पर मनन कीजिए , स्थिति एक दम स्पष्ट हो जाएगी। 
अब सवाल यह उठता है कि अपने नज़रिये या दृष्टिकोण को कैसे बदलें। यदि आप वास्तव में जीवन में कामयाब बनना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले अपने दृष्टिकोण से ही शुरुवात करनी होगी।  आपको एक सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना होगा। और सबसे जरुरी बात शुरुवात आपको आज से ही करनी होगी। 

अच्छी किताबों का अध्ययन:  अच्छी किताबें हमारे मष्तिष्क को परिशोधित करती हैं हमारे विचारों को परिमार्जित  करती हैं और हमारे ज्ञान को परिवर्धित करती हैं। जैसे जैसे हमारा ज्ञान बढ़ता है वैसे वैसे हमारा आत्मविश्वास भी बढ़ता जाता है। हमारा आत्मविश्वास हमारे आत्मबल को मजबूत करता है और हमे अपनी क्षमता का एहसास होता है। ऐसी स्थिति में हमारी सोच पर भी प्रभाव पड़ता है। जब हमारा आत्मविश्वास मजबूत होता है तो हमारा दृष्टिकोण भी सकारात्मक होता है। 
Knowledge, Book, Library, Glasses अच्छी संगत : जिसके साथ हम अपना ज्यादा समय बिताते हैं उसका हमारी सोच पर बहुत ही गहरा असर पड़ता है। आप अच्छे और सफल लोगों की संगत में कुछ दिन गुजार कर देखिये और अपने सोचने के तरीके का आकलन कीजिए। आप पाएंगे कि आप भी उनकी तरह ही सोचने लगे हैं। ठीक इसी प्रकार आप शराब पीने वालों की सोहबत में रह कर देखिए बहुत ज्यादा चांस है कि आप भी उनकी तरह ही दारु पीने लगे। कहने का मतलब यह नहीं है कि केवल सफल लोगों की संगत में रहकर सफलता हासिल की जा सकती है किन्तु ऐसे लोगों के सानिध्य में रहने से हमारा दृष्टिकोण काफी प्रभावित होता है और हम उन्ही की तरह ही सोचना आरम्भ कर देते हैं और यह हमारी सोच को सकारात्मक बनाता है जो सफलता के लिए अति आवश्यक और प्रथम कदम है।  

हमेशा जिम्मेदारी लें : कभी भी अपनी जिम्मेदारियों से न भागें। जिम्मेदारियों का स्वागत करें। आप देखेंगे जिम्मेदारी लेने के बाद आपको रास्ते दिखने शुरू हो जाते हैं। इसके अलावा जिम्मेदारियों को निभाने से आपके अंदर आत्मविश्वास काफी मजबूत हो जाता है और यह मजबूत आत्मविश्वास आपके दृष्टिकोण और सोच को सकारात्मक बनाता है। जिम्मेदारियां निभाने वाले व्यक्ति के अनुभव उसको इतना मजबूत बना देते हैं कि उसे हर काम सरल लगने लगता है और यह सरल लगना ही उसके सकारात्मक नज़रिये का प्रतिक है।   

शिकायत या बहाने न करें : शिकायत या बहाने बनाने की आदत आपको हमेशा सफलता से वंचित करती है। इसकी वजह से आप अपने काम में मन न लगाकर हर व्यवधान पर शिकायत लेकर बैठ जाते हैं और जितनी बार आप शिकायत करते हैं उतनी बार आप सफलता से दूर होते जाते हैं। यही हाल बहाने करने का है। बहाने करने वाला व्यक्ति कभी सफल नहीं हो सकता। और जब आप बार बार सफलता से वंचित होते हैं तो आपके अंदर नकारात्मक विचार घर करने लगते हैं। ऐसी स्थिति में आपका किसी भी काम के प्रति नजरिया नकारात्मक होता है। अतः एक सकारात्मक दृष्टिकोण के लिए हमें अपनी इस आदत से छुटकारा पाना होगा। 

ईर्ष्या या जलन न रखें : ईर्ष्या न केवल हमारे शरीर की दुश्मन है बल्कि यह हमारे मष्तिष्क को भी पंगु कर देती है। हष्ट पुष्ट शरीर में भी यदि ईर्ष्या का रोग लग गया तो उसे गलते या बीमार पड़ते देर नहीं लगती। यह हमारे शरीर को खोखला बना देती है। इसके साथ ही यह हमारे मष्तिष्क पर भी अपना बहुत ही बुरा प्रभाव डालती है यह मष्तिष्क  चेतनाशून्य बना देती है। और जब मस्तिष्क स्वस्थ नहीं रहेगा तो उससे हम कैसे सकारात्मक सोच की उम्मीद कर सकते हैं। एक ईर्ष्याग्रस्त व्यक्ति हमेशा नकारात्मक सोच ही रखता है। अतः अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक रखना है तो हमें ईर्ष्या को अविलम्ब त्यागना होगा। 

गुस्से को सकारात्मकता में बदलें: गुस्सा या क्रोध अपने आप में एक बहुत ही बड़ी ऊर्जा होती है। जरुरत है इसका सही इस्तेमाल करने की। जीवन में जब भी आपको किसी अपमान की वजह से गुस्सा आये तो आपको इस क्रोध का सकारात्मक इस्तेमाल करने की  जरुरत है और यदि आप ऐसा कर पाते हैं तो समझिये आप इतिहास रच देंगे। इतिहास गवाह है जब जब किसी ने अपने अपमान या क्रोध की अग्नि का सकारात्मक इस्तेमाल किया है नयी इबादत लिख गया है। अपने काम में जब भी आपको गुस्सा आता है आप उससे दुखी होने के बजाय उसके कारणों की पड़ताल करें और उन कारणों को दूर करने का प्रयास करें। आपका यह प्रयास आपके दृष्टिकोण को काफी हद तक सकारात्मक बनाएगा।  
इसे डिटेल में समझने के लिए इस लिंक पर जाएँ 



हमेशा आपने को व्यस्त रखें: कहते हैं खाली दिमाग शैतान का घर होता है। बात एकदम सही है शैतान का घर नहीं तो कम से कम नकारात्मक ऊर्जा का घर तो जरूर होता है। यह नकारात्मकता आपको निराशा से भर देती है और आपका किसी भी काम के प्रति नजरिया चेंज हो जाता है। एक सफल व्यक्ति की दिनचर्या आप देखेंगे आप पाएंगे वह अपने को अपने प्रतिदिन के कामों में हमेशा व्यस्त रखता है। 

खुश रहें और जोर से हँसे : बड़ी ख़ुशी के इंतज़ार में छोटी छोटी खुशियों को इग्नोर न करें।अपने जीवन की हरेक ख़ुशी का एन्जॉय करें और ठहाके लगाकर हंसें। यह आपके मस्तिष्क को न केवल रिफ्रेश कर देगा बल्कि आपके अंदर एक नहीं ऊर्जा और जोश का भी संचार करेगा। एक प्रसन्नचित और ऊर्जा से लबरेज मस्तिष्क  सकारात्मक विचारों से संपन्न होता है और उसकी सोच और नजरिया भी सकारात्मक ही होता है। अतः ख़ुशी की प्रतीक्षा न करें जो है उसी में खुश रहें और खुलकर हंसें। 
Smiley, Joy, Heart, Love, Smile, Flower कृतज्ञता व्यक्त करें : थैंक्स बोलना अपनी आदत में शुमार कीजिये यह आपके व्यक्तित्व को व्यापक बनाता है। यह पॉजिटिव एटीच्यूड को दर्शाता है और लोगों में आपकी स्वीकार्यता की वृद्धि करता है। लोग आपका काम करने के लिए उत्सुक रहेंगे।  यह स्थिति आपके आत्मविश्वास को बढ़ाती है और जब आत्मविश्वास बढ़ता है तब आपका दृष्टिकोण या नजरिया में भी परिवर्तन लाकर उसे सकारात्मक बनाती है। 

मैडिटेशन करें: मैडिटेशन हमारी एकाग्रता में वृद्धि लाता है। और यह एकाग्रता हमारे विचारों को दृढ और परिपक्व बनाती है। मैडिटेशन हमारे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बनाता है दिमाग को शांत करता है और  हमारे दृष्टिकोण में व्यापक बदलाव लाता है।
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ये सारे प्रयोग हैं तो बहुत ही मामूली और छोटे परन्तु हमारे दृष्टिकोण या नज़रिये को एकदम से बदल कर रख देते हैं। 

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