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Teamwork

लता को गाते सुनता हूँ मंत्रमुग्ध हो जाता हूँ। रोम रोम झंकृत और प्रसन्न हो जाता है और मुँह से वाह वाह निकल पड़ता है। उनकी कला ,उनकी साधना ,उनकी मेहनत का कायल हो जाता हूँ। किन्तु फिर सोचता हूँ उस गीतकार के बारे में जिसने उस गीत की रचना की , उस संगीतकार के बारे में जिसने सुर दिए,धुन निकाली। क्या उनकी मदद के बिना उस गाने में उतना ही आनंद आता ? शायद नहीं। दोस्तों किसी भी सफलता के पीछे केवल वह सफल व्यक्ति नहीं होता बल्कि एक पूरी टीम होती है जो उसे उस मुकाम तक ले जाती है। कई बार व्यक्तिगत सफलताओं में भी जहाँ हमें लगता है कि अमूक व्यक्ति ने अमूक सफलता हासिल की है वहां भी गहन विश्लेषण किया जाय तो उसके पीछे उसके परिवार ,समाज ,कोच का कुछ न कुछ रोल समझ में आता है। मै उस व्यक्तिगत सफलता में उस व्यक्ति की कड़ी मेहनत को कम करके नहीं आंक रहा हूँ बल्कि उसकी प्रशंसा  करता हूँ और मानता हूँ कि उसकी मेहनत के बिना सफलता नहीं मिल सकती थी। एक युवक पढ़ लिख कर अच्छी नौकरी प्राप्त कर लेता है बधाईओं का ताँता लग जाता है किन्तु जब उससे पूछा जाता है कि अपनी सफलता का श्रेय किसे देंगे तो वह अपने माँ बाप , पत्नी , दोस्त और न जाने किसका किसका नाम लेने लगता है। बात सही भी है उसने मेहनत की किन्तु पत्नी,माँ बाप,दोस्त ने मेहनत के लिए माहौल बनाया ,प्रेरणा और हौसला दिया। समय पर खाना बनाकर देना कपडे धुलना , अपने साथ समय बिताने की जिद्द न करके एकांत माहौल प्रदान करना या बाहर तैयारी के लिए भेजना, खुद धैर्य रखना और धैर्य देना , बहुत सारे फैक्टर्स हैं। सफलता में इनका योगदान बहुत ज्यादा नहीं तो कम भी नहीं है। कई बार तिरस्कार के रूप में एक अलग तरह का सपोर्ट परिवार और समाज से मिलता है जो उसे सफलता की ओर ले जाती है। काली दास और तुलसी दास शायद अपनी ऊचाईओं को न छू पाते यदि उन्हें अपनी अपनी पत्निओं से तिरस्कार न मिला होता। बैट्समैन शतक बनाता है अच्छी बात है किन्तु उसके साथ तालियों का थोड़ा बहुत हक़दार उसका कोच और उसका जोड़ीदार बैट्समैन भी होता है जिसके बिना वह शायद मुश्किल होता। कहने का मतलब है कि हर सफलता के पीछे एक टीम होती है और टीमवर्क होता है। यानि सफल होना है तो आपकी टीम सही होनी चाहिए।

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दूसरे शब्दों में यदि आपको सफल होना है तो आपको एक अच्छी टीम बनानी होगी। कई बार यह बनी बनाई मिलती है तो कई बार खुद बनानी पड़ती है। ऊपर की चर्चा में कई उदाहरणों में टीम गौण और कम  महत्वपूर्ण दिखती है खासकर व्यक्तिगत सफलता में, तो भी हम उसे एकदम से इग्नोर नहीं कर सकते। तिरस्कार और उपहास वाले केस में कई लोग इसे टीम नहीं मानेंगे किन्तु चुकि  सफलता के लिए वह उत्प्रेरक का काम करते हैं और उसके बिना सफलता का प्रयास या तो नहीं होता या शिथिल होता और सफलता संदिग्ध होती अतः वे भी टीम का ही एक हिस्सा होते हैं।
टीम वर्क का सबसे अच्छा और सबसे पुराना उदहारण अमृत मंथन की कथा को मान सकते हैं जिसमे अमृत की प्राप्ति के लिए यानि एक महान उद्द्येश्य को प्राप्त करने के लिए देवता और दानव यानि दो शत्रुओं ने एक टीम का गठन किया और अन्य सदस्यों  रूप में शेषनाग और पर्वत का भी इस्तेमाल किया गया। यानि किसी महान उद्द्येश्य को प्राप्त करने के लिए आपको  शत्रुता , उच्च नीच , वैमनस्य सबको त्याग कर टीम के रूप में  काम करना होगा ,अपने अपने रोल को निभाना होगा। पौराणिक कथाओं में रामायण में भी टीमवर्क का एक बहुत ही बढियाँ उदहारण मिलता है जब राम को सीता का पता लगाने और लंका पर आक्रमण करने के लिए पूल बनाना था। राम ने  टीम बनाई जिसमे बन्दर, भालू ,पक्षी ,इंसान और गिलहरी सब थे। फिर इसी टीम ने सीता का पता लगाया और पूल बनाकर रावण को परास्त भी किया।
इन सब उदाहरणों से पता  कि किसी सफलता के लिए टीम कितना अहम् होती है। कई बार यह पहले से बनी बनाई मिल जाती है तो कई बार खुद हमें बनानी पड़ती है। कई बार यह परोक्ष रूप से बिना सामने आये हमारी मदद करती है।

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अतः हमें अपने लक्ष्य के हिसाब से एक टीम बनानी चाहिए जिसमे  सदस्यों का चुनाव उनकी योग्यता के अनुसार करना चाहिए। फिर काम की मॉनिटरिंग करना और उस उद्देश्य को प्राप्त करना चाहिए।  खेलों में हम टीम वर्क का अच्छा उदहारण पाते हैं कोई बैटिंग करता है तो कोई बॉलर है कोई फील्डिंग करता है तो कोई विकेटकीपिंग पर सबका बस एक ही उद्देश्य है टीम की जीत। हमेशा याद रखे आप खुद सब कुछ नहीं कर सकते किन्तु सब कुछ करा सकते। हैं। सरकार , बैंक , रेलवे ,अस्पताल या  कंपनी सभी टीम के रूप में ही काम  करते हैं। यहाँ तक हमारा समाज भी एक टीम की तरह ही होता है जिसमे कोई समाज के लिए अन्न उपजाता है तो कोई कपड़ा बुनता है कोई बर्तन बनाता  तो कोई ज्ञान बांटता है। काम तो सब अपना ही करते हैं किन्तु उसका प्रभाव व्यापक रूप से पुरे समाज पर पुरे देश पर पड़ता है। अतः किसी ने अपने काम में लापरवाही की तो उसका तो नुकसान होता ही है साथ ही पुरे समाज का भी नुकसान होता है। हम यह भी कह सकते हैं कि हम एक दूसरे के पूरक हैं। 

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