Skip to main content

Social Media Aur Internet Addiction Disorder



Eye Facebook Detail Macro Face Structure I
क्या आप भी दो नीली टिक होने का इंतज़ार करते हैं और नहीं होने पर बेचैन हो जाते हैं बार बार चेक करते हैं  क्या आप भी लाइक्स और व्यूज गिनते हैं क्या आप भी बार बार मैसेज इन्फो चेक करते हैं ? यदि हाँ तो आप नेट एडिक्ट यानि आपको भी नेट के नशे ने अपने चपेट में ले लिया है और जिस प्रकार एक नशेड़ी नशे में अपनी सूध बुध खो बैठता है ठीक उसी प्रकार नेट एडिक्ट भी मानसिक रूप से चेतनाशून्य हो जाता है। उसका किसी काम में मन नहीं लगता है वह अपने काम के प्रति लापरवाह और चिड़चिड़ा हो जाता है कभी कभी वह निराश और हिंसक भी हो जाता है।
आज हम इंटरनेट युग में जी रहे हैं या यूँ कहें इंटरनेट हमारी जिंदगी का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन चूका है।  विद्युत् शक्ति के बाद यही एक चीज़ है जिस पर लगभग सारी चीज़ें निर्भर हो गयी हैं। सारे कामों में इसका दखल है। इंटरनेट ने हमारी जिंदगी को काफी आसान और आरामदायक बना दिया है। मोबाइल क्रांति के बाद
इंटरनेट क्रांति के  साथ ही कई सामजिक और राजनितिक बदलाव हुए। इंटरनेट भारतीय जनमानस को अपना गुलाम बना चूका है। लोगों की सोच, उनके विचार , सामाजिक व्यवहार, रहन सहन सब पर इंटरनेट का प्रभाव देखा जा सकता है। इंटरनेट ने कई असंभव या देरी से होने वाले कार्यों को संभव या द्रुत बना दिया है वहीँ यह कई बुराइयों का जनक भी है। रेलवे इन्क्वारी के सामने या रिजर्वेशन काउंटर के सामने अब भीड़ नदारद हो रही है। लोग घर से ही ट्रैन का स्टेटस देख कर निकल रहे हैं साथ ही अपना टिकट खुद ही बुक कर रहे हैं। अब आपको दुकान जा कर घंटों सामान पसंद करने की जरुरत नहीं बल्कि दुकान आपकी मोबाइल में ही शिफ्ट हो चूका है। कहीं से कुछ भी पसंद करके आप मंगा सकते हैं। सारी दुनिया एक प्लेटफार्म पर आ चुकी है इसमें आप अपने बिछड़े हुए दोस्तों से मिल सकते हैं, दूर रहने वाले रिश्तेदारों के हाल चाल पा सकते हैं और आपके जीवन में क्या क्या परिवर्तन हुए मसलन शादी, बच्चे अन्य कार्यक्रम टूर सब शेयर कर सकते हैं। किसी को किसी का हाल चाल पूछने की जरुरत ही नहीं। सोशल साईट आन किया और आप सब जानकारियों से अवगत हो गए। 
कुल मिलकर हम कह सकते हैं इंटरनेट ने हमें अपने चंगुल में ले लिया है या हम खुद उसके चंगुल में आ गए हैं।
कहा जाता है कि हर चीज़ की अति नुकसानदायक होती है। यही बात इंटरनेट पे भी लागू होती है। जब तक हम अपने अनुसार उसका प्रयोग करते हैं तब तक तो हम फायदे में रहते हैं परन्तु जहाँ हम खुद प्रयोग होने लगते हैं उसके दुष्प्रभाव दीखने लगते हैं। खुद प्रयोग होने का मतलब है कि हम मजबूर हो जाएँ उसे ऑन करने के लिए चाहे उसकी जरुरत हो न हो। सोशल मिडिया पर एक्टिव रहने का लोगों को ऐसा चस्का लगा है कि लोग अपने जरुरी कामों को भी छोड़ कर उसे चेक करते रहते हैं। रात को सोने के पहले तक, सुबह में उठने पर सबसे पहले लोग अपना मोबाइल चेक करते हैं। स्थिति यहाँ तक आ चुकी है कि यदि दो घंटे मोबाइल डिस्चार्ज हो जाये तो वे बेचैन हो जाते हैं।

क्या है इंटरनेट एडिक्शन डिसऑर्डर                                        What is Internet Addiction Disorder in Hindi 
Smartphone Hand Photomontage Faces Photo A

इंटरनेट के प्रति लोगों की यह चिपकने वाली प्रवृति पहले तो आदत फिर नशा और फिर बीमार बना रही है। लोग हर पांच दस मिनट पर अपना स्टेटस चेक कर रहे हैं, नोटिफिकेशन देख रहे हैं, व्यूज और लाइक्स गिन रहे हैं। कई लोग तो घंटों नेट सर्फिंग में डूबे रह रहे हैं। ऐसे व्यक्ति चाह कर भी नेट से दूर नहीं रह पाते हैं। शुरू शुरू में तो पता नहीं चलता पर धीरे धीरे लोग इसके एडिक्ट हो जाते हैं और जैसे ड्रग एडिक्ट ड्रग के लिए बेचैन और छटपटाते हैं ठीक उसी प्रकार नेट एडिक्ट की भी हालत हो जाती है। मेडिकल साइंस में इसे एक मानसिक बीमारी कहा जाता है और इसका नाम इंटरनेट एडिक्शन डिसऑर्डर दिया गया है। इसे शार्ट में IAD भी कहा जाता है। यह बीमारी गंभीर न दीखते हुए भी वास्तव में बहुत नुकसानदायक है। कई मनोवैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि यह लत ड्रग्स या शराब जितना ही खतरनाक असर डालती है। बच्चों में तो इसका खासा असर देखा जा  सकता है।

इंटरनेट एडिक्शन डिसऑर्डर से पीड़ित व्यक्ति में नीचे दिए गए लक्षण पाए जा सकते हैं 

  • निराशा और चिड़चिड़ापन
  • ड्राई आँखें और धंसी आँखें
  • कमजोर दृष्टि और आँखों में जलन
  • सिरदर्द और कमरदर्द रहना
  • हाथ और कलाइयों में दर्द तथा अकड़पन होना
  • वजन में तेजी से बढ़ोतरी या घटना
  • अनिद्रा
  • थकान और कमजोरी
  • मानसिक कमजोरी तथा भावूक होना
  • बच्चों का जिद्दी होना
  • बेचैनी और उतावलापन
  • अंगूठे तथा अंगुलियों में क्रैम्प आना
  • एकाग्रता का आभाव
इंटरनेट एडिक्शन डिसऑर्डर के रोगी प्रायः सोशल साइट्स जैसे फेसबुक,व्हाट्सअप, ट्विटर, यूट्यूब  और अश्लील साइट्स का जरुरत से ज्यादा प्रयोग करते है। इसके अलावा ऑनलाइन गेम्स का भी इसमें बहुत बड़ा हाथ है। इन्ही साइटों पर लोग ज्यादा समय देते हैं। इस तरह के रोगी प्रति दिन पांच से सात घंटे इन साइट्स पर देने लगते हैं। ये साइट्स अपने यूजर्स को लम्बे समय तक बाँधे रखती हैं। हालाँकि यह आवश्यक नहीं है साईट कोई भी हो जरुरत से ज्यादा प्रयोग इस तरह का नुकसान पंहुचा सकती है। 

इंटरनेट एडिक्शन डिसऑर्डर से होने वाले नुकसान 
  1. शारीरिक : इस बीमारी से ग्रसित लोगों में कई तरह के शरीरीरिक दिक्कतें आती हैं। आँखों के सूखने के अलावा उसमे जलन, दृष्टिदोष आदि भी आ जाती है। इसके अलावा अँगुलियों तथा कलाइयों में अकड़न,सुन्नपन और दर्द हो सकता है। अनिद्रा, भूख की कमी , मोटापन या दुबलापन आदि आ सकता है।  

  1. मानसिक : ऐसे लोग भावनात्मक रूप से काफी कमजोर हो जाते हैं। ऐसे लोगों में एकाग्रता की कमी, चिड़चिड़ापन, उदासी  या अवसादग्रस्त होने की स्थिति भी आती है। नेट से दूर होने पर ऐसे लोग बेचैन तथा चिड़चिड़े हो जाते हैं। पर्याप्त लाइक्स,व्यूज या कमैंट्स नहीं मिलने पर वे निराश और अवसादग्रस्त हो जाते हैं। वे बार बार रिफ्रेश करके लाइक्स और व्यूज आदि में हुई बढ़ोतरी को देखते रहते हैं। जब उम्मीद के अनुरूप इनकी संख्या नहीं बढ़ती है तो वे निराश और बेचैन हो जाते हैं। ऐसे में वे बार बार अपने मुख्य काम को छोड़ कर इन्हे चेक करते रहते हैं  जिससे कि इनका ध्यान बटता है।  
  2. सामाजिक :ऐसे लोग अपना सारा समय नेट पर देने की वजह से समाज से कटते चले जाते हैं। ये प्रायः एकाकी और अंतर्मुखी हो जाते हैं। ऐसे लोग डिप्रेसन के शिकार हो जाते हैं। धीरे धीरे उनका आत्मविश्वास लेवल गिरने लगता है। 
  3. आर्थिक : इंटरनेट एडिक्शन डिसऑर्डर व्यक्ति के आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित करता है। बार बार नेट चेक करने की वजह से काम में लापरवाही होती है और कोई काम समय पर पूरा नहीं होता और न ही परफेक्ट होता है। इस वजह से काम छूटने का भी भय रहता है। साथ ही यह प्रोडक्टिविटी को भी प्रभावित करता है और उत्पादन कम होने लगता है जो कि अंततः हमारे आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है। 
इंटरनेट एडिक्शन डिसऑर्डर से बचने के उपाय 

इंटरनेट एडिक्शन डिसऑर्डर से बचना नामुमकिन तो नहीं पर आसान भी नहीं है। इसके लिए दृढ इच्क्षा शक्ति का होना आवशयक है। इसका पता चलते ही इससे बचने के उपाय शुरू कर देने चाहिए। इससे कुछ उपाय के द्वारा बचा जा सकता है 


  • सबसे पहले आपको स्वयं इस बात को मानना होगा कि आप इंटरनेट एडिक्ट हो चुके हैं। ऐसा इस लिए कहा जा रहा है क्योंकि अकसर यह देखा जाता है कि ऐसे रोगी अपनी इस बीमारी से अनभिज्ञ रहते हैं। यहाँ तक कि कोई बताता है तब भी उन्हें विश्वास नहीं होता। अतः सिम्टम्स दीखते ही सतर्क हो जाना चाहिए। 
  • इससे बचने के लिए आपके अंदर दृढ इच्क्षा शक्ति होनी चाहिए क्योंकि इससे बचने के लिए किसी दवा की नहीं बल्कि आपकी दिनचर्या को संयमित रखने की जरुरत है। 
  • इससे बचाव के लिए आपको अपने सोशल साइट्स पर गतिविधि कम करना होगा बल्कि उनके लिए आपको फिक्स्ड टाइम बनाना होगा जैसे कि सोशल साइट्स दिन में कितनी बार चेक करनी है। सोशल साइट पर मित्रों की संख्या सिमित रखे। व्हाट्सप्प आज हमारे काम का हिस्सा बन चूका है यह हमारे काम में काफी मददगार साबित होता है अतः इसके लिए टाइम निर्धारित नहीं कर सकते पर इतना तो कर सकते हैं कि अपने व्यवसाय और जॉब से सम्बंधित मैसेज को ही चेक करें तथा अन्य सभी मैसेज को दिन में एक निश्चित समय बना लें और केवल उसी समय चेक करें  और जवाब दें। यह शुरू शुरू में तो काफी मुश्किल होगा पर धीरे धीरे इस पर काबू पाया जा सकता है। 
  • अकेले कम से कम रहें और वर्चुअल मित्रों के बजाय वास्तविक मित्रों के साथ समय गुजारें। मित्रों के अलावा परिवार के सदस्यों के साथ भी समय देना चाहिए। 
  • आज के दौर में इंटरनेट को परे रख कर कोई काम नहीं किया जा सकता है कई मायनों में यह हमारे रोज़गार का ही हिस्सा है अतः न चाहते हुए भी हमें घंटों नेट के सामने बैठना पड़ता है। ऐसी स्थिति में हमें बस प्रयास करना चाहिए कि हम केवल अपने काम के साइट्स को ही खोलें अन्य साइट्स जैसे सोशल मीडिया आदि से भरसक बचना चाहिए। इनके लिए समय निर्धारित कर देना चाहिए। 
  • बच्चों पर बहुत ध्यान रखना होगा। नेट से उनकी नजदीकी आपके नियंत्रण में होनी चाहिए। 
इंटरनेट एडिक्शन डिसऑर्डर का उपचार 

इंटरनेट एडिक्शन से हुए नुकसान के लिए हमें कुछ उपचार की भी आवश्यकता पड़ सकती है 
  • आँखों के ड्राई होने तथा रौशनी कम होने की स्थिति में अविलम्ब किसी नेत्र चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। 
  • कमर दर्द, गर्दन दर्द या अँगुलियों में अकड़न होने पर भी तुरत किसी अच्छे डॉक्टर से मिलना चाहिए नहीं तो स्थिति काफी विकट हो सकती है। 
  • मानसिक विकारों के लिए सम्बंधित योगा किया जा सकता है। 
  • नींद अच्छी और पर्याप्त लें। इससे शरीर और आँखों को काफी रहत मिलती है। 
  • अकेले न रहें। दोस्तों, सहकर्मियों और परिवार के सदस्यों के साथ रहें। 
  • पौष्टिक भोजन लें। शरीर को फिट रखने के लिए थोड़ा व्यायाम भी करें। 

Popular posts from this blog

RPF Aur GRP Me Kya Antar Hai

ट्रेनों से सफर के दौरान अकसर हमें पुलिस वाले दिखाई पड़ जाते हैं। कभी ट्रैन के अंदर तो कभी प्लेटफार्म पर , कभी टिकट खिड़की के पास तो कभी माल गोदाम की तरफ। स्टेशनो पर जब भी पुलिस की बात चलती है तो जीआरपी और आरपीएफ का नाम जरूर आता है। पुलिस वालों को भी देखा जाता है तो उनके कंधे पर GRP या RPF लिखा मिलता है। बहुत कन्फ्यूजन होता है और अकसर हमारे दिमाग में यह बात आती है कि इन दोनों में फर्क क्या है। पुलिस तो दोनों हैं। आइए देखते हैं जीआरपी और आरपीएफ में क्या अंतर है ?

RPF aur GRP ka full form kya hota hai 

RPF का फुलफॉर्म होता है Railway Protection Force यानि रेलवे सुरक्षा बल जबकि GRP का फुलफॉर्म होता है Government Rail Police 

RPF Aur GRP Me Kya Antar Hai

RPF यानि रेलवे सुरक्षा बल एक सैन्य बल है जो सीधे ministry of railway के अंतर्गत आता है। इसका मुख्या कार्य रेलवे परिसम्पत्तिओं 
की सुरक्षा करना होता है। इसके अंतर्गत रेलवे परिसर में उपस्थित सारे सामान आते हैं। यह रेल मंत्रालय के प्रति जवाबदेय होता है। यह रेलवे स्टॉक , रेलवे लाइन , यार्ड , मालगोदाम इत्यादि बहुत सारी चीज़ों की सुरक्षा करता है। इन सम्…

ऐसा धन जिसे कोई चुरा नहीं सकता

ऐसा धन जिसे कोई चुरा नहीं सकता a motivational story
मोटिवेशनल स्टोरी 

"पापा पापा, बाबू ने मेरी ड्राइंग की कॉपी फाड़ दी है " बेटी ने रोते हुए शिकायत किया। "देखिए न, मैंने कितना कुछ बनाया था।" उसने फटे हुए पन्नो को जोड़ते हुए दिखाया। मैंने उसे चुप कराने की कोशिश की तो वह और भी ज्यादा रोने लगी। मैंने कहा अच्छा ठीक है चलो मै तुम्हे दूसरी कॉपी दिला दे रहा हूँ। मै कान्हा को बुलाया और खूब डांटा तो वह भी रोने लगा और बोला "दीदी मुझे कलर वाली पेंसिल नहीं दे रही थी।" अब दोनों रो रहे थे।  मैंने दोनों को समझाया। कान्हा तो चुप हो गया किन्तु इशू रोए जा रही थी। "मैंने इतने अच्छे अच्छे ड्राइंग बनाये थे , सब के सब फट गए।" वास्तव में इशू की रूचि ड्राइंग में कुछ ज्यादा ही थी। जो भी देखती उसे अपने ड्राइंग बुक में बना डालती, कलर करती और संजो कर रख लेती। मै उसको समझाने लगा देखो बेटी फिर से बना लेना, उसने कॉपी फाड़ी है किन्तु तुम्हारे हुनर को कोई नहीं छीन सकता। हुनर या टैलेंट ऐसी चीज़ है जिसे कोई नष्ट नहीं कर सकता। वह मेरे पास आकर बैठ गयी, मै उसके सर पर हाथ फेरने लगा वह अ…

पारस पत्थर : ए मोटिवेशनल स्टोरी

पारस पत्थर : ए मोटिवेशनल स्टोरी 

सोहन आज एक नयी एलईडी टीवी खरीद कर लाया था। टीवी को इनस्टॉल करने वाले मेकैनिक भी साथ आये थे। मैकेनिक कमरे में टीवी को इनस्टॉल कर रहे थे। तभी सोहन की बीबी उनके लिए चाय बना कर ले आयी। दोनों मैकेनिकों ने जल्दी ही अपना काम ख़तम कर दिया। सोहन नयी टीवी के साथ नया टाटा स्काई का कनेक्शन भी लिया था। चाय पीते पीते उन्होंने टीवी को चालू भी कर दिया था। उसी समय सोहन का पडोसी रामलाल भी आ गया। नयी टीवी लिए हो क्या ? उसने घर में घुसते ही पूछा।  हाँ लिया हूँ।  सोहन ने जवाब दिया। कित्ते की पड़ी ? यही कोई चौदह हज़ार की। हूँ बड़ी महँगी है। राम लाल ने मुंह बनाते हुए कहा। सोहन ने कहा मंहंगी तो है लेकिन क्या करें कौन सारा पैसा लेकर ऊपर जाना है। सोहन ने राम लाल को भी चाय पिलायी। चाय पीने के बाद राम लाल चला गया। सोहन अपने परिवार के साथ बैठ कर टीवी का आनंद लेने लगा।

इंसान अपने दुःख से उतना दुखी नहीं होता जितना दूसरे के सुख को देख कर

सोहन लकड़ी का काम किया करता था। खूब मेहनती था। अच्छा कारीगर था अतः उसके पास काम भी खूब आते थे।रात में अकसर दस बारह बजे तक वह काम किया करता था। इसी मेहनत का …