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Showing posts from July, 2018

Mob Power And Mob Lynching

विकासकी इस अंधी दौड़ में जो भागमभाग मची है उसमे हमारे सभ्य होने की रफ़्तार को बड़ा  नुकसान पहुंचाया है। बल्कि सचाई तो यह है  कि हम जितना ही विकास की ओर आगे निकले उतना ही हम सभ्यता के मामले पिछड़ गए हैं। मकान बड़े होते गए और हमारे दिल छोटे। बाजार को मॉलों और ऑनलाइन बाजारोँ  ने निगल लिया है। बैंकों ने किसानों को मजदूर बना दिया तो मशीनों ने मजदूरों को परदेसी बना दिया।विज्ञान ने मृत्यु दर को कम किया तो जिंदगी ने संसाधनों को। जनसँख्या का भार न केवल हमारे अवसरों को कम किया है बल्कि हमारे लिए एक बेरोजगारों की फौज खड़ी कर रहा है। जिन नवयुवकों को अपनी ऊर्जा अपने परिवार के लिए अपने देश के लिए लगानी चाहिए वो अपनी ताकत सडकों पर दिखा रहे हैं। और क्यों नहीं ऊर्जा तो कहीं संचित नहीं होगी वो तो या तो निर्माण करेगी या विनाश करेगी। चारों ओर  निराशा है हताशा है लोग जी तो रहे हैं पर शायद जिंदा नहीं हैं। स्कूल है पर शिक्षक नहीं, हॉस्पिटल हैं पर डॉक्टर नहीं, न्यायलय है पर न्यायधीश नहीं। एक एक मुकदमे को निपटने में नयी पीढ़ी जवान हो जाती है। न्याय मिलने में इसी देरी का लाभ उठा कर तथा अन्य व्याप्त भ्रष्टाचारों का ला…

Troll Kya Hai In Hindi

ट्रोल को समझने के पहले हमें हाल ही में घटी कुछ घटनाओं पर नज़र डालना होगा। अभी कुछ समय पहले की बात है देश में तमाम बलात्कार की बढ़ती घटनाओं पर कांग्रेस पार्टी की प्रियंका चतुर्वेदी ने एक ट्वीट किया। बात नार्मल से बयान की थी पर कुछ ही घंटों में इस एक ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया में बवाल हो गया। उनके इस बयान की प्रतिक्रिया में बहुत से भद्दे भद्दे, अश्लील कमेंट आने लगे। एक ने तो उनकी बेटी से बलात्कार करने की धमकी तक दे डाली। दूसरी घटना सुषमा स्वराज के साथ हुई एक पासपोर्ट के मामले में लोगों ने उनके ट्वीटर अकाउंट पर भद्दे कमैंट्स और गालियों की बौछार कर दी। किसी के विचार से असहमत होना न होना स्वाभाविक है। विचारों का विरोध भी स्वाभाविक है किन्तु विरोध का यह स्वरुप किसी भी मायने में किसी सभ्य समाज का हिस्सा नहीं हो सकते। यह एक तरह की हिंसा है या यूँ कहे शाब्दिक हिंसा है वैचारिक बलात्कार है और मानसिक दिवालियापन है। एक तरह से यह चरित्र हनन या करैक्टर एसेसिनेशन है।

What is Troll      ट्रोल किसे कहते हैं

सोशल मीडिया में इस तरह कमैंट्स करने की प्रक्रिया ट्रोल कहलाती है और ऐसा करने वाले ट्रोलर कहलाते हैं। …

Social Media Aur Internet Addiction Disorder

क्या आप भी दो नीली टिक होने का इंतज़ार करते हैं और नहीं होने पर बेचैन हो जाते हैं बार बार चेक करते हैं  क्या आप भी लाइक्स और व्यूज गिनते हैं क्या आप भी बार बार मैसेज इन्फो चेक करते हैं ? यदि हाँ तो आप नेट एडिक्ट यानि आपको भी नेट के नशे ने अपने चपेट में ले लिया है और जिस प्रकार एक नशेड़ी नशे में अपनी सूध बुध खो बैठता है ठीक उसी प्रकार नेट एडिक्ट भी मानसिक रूप से चेतनाशून्य हो जाता है। उसका किसी काम में मन नहीं लगता है वह अपने काम के प्रति लापरवाह और चिड़चिड़ा हो जाता है कभी कभी वह निराश और हिंसक भी हो जाता है।
आज हम इंटरनेट युग में जी रहे हैं या यूँ कहें इंटरनेट हमारी जिंदगी का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा बन चूका है।  विद्युत् शक्ति के बाद यही एक चीज़ है जिस पर लगभग सारी चीज़ें निर्भर हो गयी हैं। सारे कामों में इसका दखल है। इंटरनेट ने हमारी जिंदगी को काफी आसान और आरामदायक बना दिया है। मोबाइल क्रांति के बाद
इंटरनेट क्रांति के  साथ ही कई सामजिक और राजनितिक बदलाव हुए। इंटरनेट भारतीय जनमानस को अपना गुलाम बना चूका है। लोगों की सोच, उनके विचार , सामाजिक व्यवहार, रहन सहन सब पर इंटरनेट का प्रभाव देखा…

Japani Encephalitis Ya Japani Bukhar Kya Hai, Bachne Ke Upay

जुलाईका महीना शुरू होते ही भारत में खासकर उत्तर भारत में कई बीमारीओं का प्रकोप चालू हो जाता है इन बीमारियों में डेंगू,चिकेनगुनिया,जापानीज इंसेफ्लाइटिस आदि प्रमुख हैं। ये सारी बीमारियां काफी खतरनाक और जानलेवा हैं। अकेले जापानी इंसेफ्लाइटिस ने ही पुरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में महामारी का रूप ले लिया है। इन महीनों में गोरखपुर और आसपास के सारे अस्पताल इस रोग के मरीजों से भरे रहते हैं। हर साल कई लोगों की खासकर बच्चों की मृत्यु भी हो जाती है। उत्तर प्रदेश के अलावे बिहार,झारखण्ड,उड़ीसा,पश्चिम बंगाल,असम,मेघालय,मणिपुर,कर्नाटक आँध्रप्रदेश,तमिलनाडु आदि राज्य भी इस बीमारी से प्रभावित हैं।
जापानी इंसेफ्लाइटिस का सबसे पहला केस दुनिया में जापानी एन्सेफलाइटिस का सबसे पहला केस जापान में सन 1871 में पाया गया। इसी कारण इसे जापानी एन्सेफलाइटिस या जापानी बुखार कहा जाता है। यह मुख्य रूप से चावल के खेतों में पनपने वाले मच्छरों  के जापानी एन्सेफलाइटिस वायरस जो एक फ्लेविवायरस होता है से संक्रमित होने से होता है। ये मच्छर जब पालतू सूअर और पक्षियों को काटते हैं तो ये वायरस उनके शरीर के रक्त में चले जाते हैं जहाँ वे प…