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Sting Operation Kya Hai

स्टिंग ऑपरेशन पत्रकारिता की वह विधा है जिसमे टारगेट किये हुए व्यक्ति की जानकारी के बिना उससे किसी मुद्दे पर राज उगलवाया जाता है या उससे  उस कृत को करवा कर जिसका उस पर संदेह हो तथा  जो समाज या कानून की नज़र में गलत हो  गुप्त कैमरे या अन्य उपकरण  की मदद से विडिओ या ऑडियो क्लिप तैयार करके  की  जाती है तथा उसका प्रसारण करके उस सच को सबके सामने लाया जाता है ।

Sting Operation Ke Uddeshya 

स्टिंग ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य जनता के सामने व्यक्ति की नैतिक,सामाजिक और कानूनी अपराधों को सामने लाना है जिससे वह इंकार करता है। यह एक तरह से सबूत का कार्य भी करता है। आजकल इसका इस्तेमाल ब्लैकमेल करने में तथा अपने चैनल की टीआरपी बढ़ाने में भी किया जा रहा है।

Sting Operation Ka Itihas

1930 के आसपास स्टिंग शब्द अमेरिकी स्लैंग  में प्रयोग किया जाता था जिसका अर्थ चोरी या धोखेबाज़ी की क्रिया जिसकी योजना पहले से ही बना ली गयी हो, होता था। 1970 के आसपास अमेरिकी पुलिस अपराधिओं को फ़साने के लिए गुप्त ऑपरेशन करती थी जिसे स्टिंग ऑपरेशन कहा जाता था। बाद में इस तरह किसी भी अपराधिओं को पकड़ने के लिए बिछाए जाने वाले जाल को स्टिंग ऑपरेशन कहा जाने लगा। इसमें किसी रिश्वतखोर को रिश्वत लेते हुए हुए पकड़ने के लिए जानबूझ कर रिश्वत की पेशकश, किसी अवैध सप्लायर को पकड़ने के लिए ग्राहक बनकर जाना,किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के गिरे हुए चरित्र को दिखाने के लिए लड़की भेजना इत्यादि कई तरह की क्रियाएं हो सकती हैं। धीरे धीरे पुलिस की इस खुफ़िआ ऑपरेशन को पत्रकारिता ने अपना लिया और जल्दी ही यह पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया। टीवी ,इंटरनेट, आधुनिक सूक्ष्म कैमरे ,सूक्ष्म रिकॉर्डिंग डिवाइस आदि आ जाने से इस विधा को और धार मिल गया है जिसका इस्तेमाल धड़ल्ले से हो रहा है।

Some Cases Of Sting Operation

2005 में शक्ति कपूर का स्टिंग ऑपरेशन जिसमे उन्हें  फिल्मों में रोल दिलाने के लिए लड़की को कास्टिंग काउच के लिए राज़ी करने का प्रयास करते हुए दिखाया गया था, काफी चर्चित हुआ था। संसद में प्रश्न पूछने के लिए धन लेते हुए कई सांसदों का विडिओ टेप जिसे कोबरा पोस्ट  डॉट कॉम के अनिरुद्ध बहल ने ऑपरेशन दुर्योधन के नाम से तैयार किया था,भारतीय राजनीती की चूले हिला कर रख दिया था। टीवी पत्रकारिता के दौर में एक नए धारदार हथियार के रूप में प्रयोग होने वाले इस घातक हथियार ने पत्रकारों को भी नहीं छोड़ा। जिंदल ग्रुप के द्वारा किये गए एक स्टिंग में ज़ी न्यूज़ के दो पत्रकारों को 100 करोड़ रुपये एक न्यूज़ को दबाने के लिए मांगते हुए देखा गया। जिसमे दोनों पत्रकारों बाद में गिरफ़्तारी भी हुई। 2006 में स्टार न्यूज़ के द्वारा एक स्टिंग किया गया था जिसमे गवाहों को मनु शर्मा पक्ष में गवाही देने के लिए राज़ी किया जा रहा था। तहलका डॉट कॉम द्वारा 2001  किये गए स्टिंग ऑपरेशन  ने देश में भूचाल ला दिया था जिसमे रक्षा मंत्रालय में रक्षा सौदों के एवज़ में रिश्वत  देते हुए दिखाया गया था। इस स्टिंग की वजह से तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नानडिस को इस्तीफा देना पड़ा था।

Sting Operation Aur Mobile Kranti

स्टिंग ऑपरेशन ने टीवी और ऑनलाइन पत्रकारिता को एक नया आयाम दिया है। इसने समाज में होने वाले बहुत से अपराधों,भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को उजागर किया है। आज मोबाइल क्रांति के दौर में इसका क्षेत्र काफी व्यापक हुआ है। हर हाथ में मोबाइल होने से इस तरह की गतिविधयां जो गलत होती हैं,सबके सामने आ रही हैं और अपराधी पकड़े भी जा रहे हैं।

Sting Operation Aur Hamari Privacy

स्टिंग ऑपरेशन जहाँ एक ओर कई तरह के अपराधों और गैर कानूनी कार्यकलापों को सामने लाया है वहीँ दूसरी तरफ एक नए बहस को जन्म दिया है। बहुत से विद्वानों का मानना है कि यह हमारे निजता के अधिकारों का अतिक्रमण करता है। बहुत से केसेज ऐसे मिले हैं जिसमे व्यक्ति के अंतरंग संबंधों का भी वीडियो बना कर उसे अपराध की तरह पेश करके उसे बदनाम किया गया। कई बार केवल ब्लैक मेल करने के लिए भी स्टिंग का प्रयोग किया गया।
पत्रकारिता के लिए स्टिंग का प्रयोग उचित है पर इसके साथ ही स्टिंग करने वाले की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए तभी यह अपने उद्देश्य में सफल हो पायेगा। 

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