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Nipah Virus Kya Hai......... Kerala Me Bhay Ka Mahoul

केरल सरकार ने पूरे राज्य में मेडिकल इमरजेंसी लगा दी है। राज्य के सारे हॉस्पिटल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हाई अलर्ट पर हैं। सारे मेडिकल स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी गयी हैं। यह सारी तैयारी उस महामारी से निबटने के लिए किया जा रहा है जिसने केरल में इस समय भय का माहौल उत्पन्न कर दिया है। लोग पैनिक में हैं और घबराये हुए हैं।  बात ही कुछ ऐसी है मंगलवार तक दस लोगों की मौत हो चुकी है और दो लोगो की जान क्रिटिकल बनी हुई है। इन सारी मौतों के पीछे एक वायरस है जिसका नाम निपाह है। यह इतना खतरनाक है कि इसके मरीज के संपर्क में आते ही खुद को भी इन्फेक्शन हो जाता है। यही वजह है कि यह बहुत ही तेजी से फ़ैल रहा है। यहाँ तक इसका इलाज करते समय डॉक्टर और नर्सों को भी अति सावधानी बरतनी पड़ रही है। अभी एक नर्स की मौत मरीज की देख रेख करने में इसके इन्फेक्शन से हो गयी है।
केरल में निपाह से मौत का सबसे पहला केस कोझीकोड़ के एक परिवार से मिला जहाँ एक ही परिवार के दो भाइयों और एक दूसरी महिला की मौत हो गयी। केरल के स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार 18 लोगों के सैंपल में 12 केस पॉजिटिव पाए गए है। इसके अलावा 9 लोग मेडिकल सर्विलांस पर रखे गए हैं। साथ ही करीब 94 लोगों को घर के अंदर ही अलग रखा गया है। इस महामारी से सबसे ज्यादा कोझीकोड़ और मल्ल्पुरम जिले प्रभावित हुए हैं। पेरम्बरा जहाँ से पहला केस मिला है वही पास में एक कुँए से निपाह वाइरस से संक्रमित कुछ चमगादड़ मिले हैं। उस कुँए को सील कर दिया गया है। एक नर्स लिनी पुतुस्सेरी जो निपाह वाइरस संक्रमित मरीज के इलाज टीम का हिस्सा थी उसको भी संक्रमण हुआ और उसकी मौत हो गयी। डॉक्टरों के अनुसार इसके संक्रमण के बाद मरीज में तेज सरदर्द, बुखार,मष्तिष्क की स्वेलिंग, निद्रा तथा कोमा की स्थिति भी आ सकती है। डॉक्टरों का कहना है कि 70 प्रतिशत केसेस में मरीज की मौत हो जाती है। अभी तक इसका कोई टिका नहीं खोजा जा सका है।

The First Case of Nipah Virus

निपाह वाइरस इन्फेक्शन का दुनिया में सबसे पहला केस 1998 मलयेशिआ सूअर पालने वाले किसानों में पाया गया था। 2004 में NVI के कुछ केसेस बांग्लादेश और सिंगापूर में भी पाए गए थे जिसमे खजूर तथा ताड़ की ताड़ी को पीने से कुछ लोग बीमार पड़ गए थे।

What is Nipah Virus

NVI यानि निपाह वाइरस इन्फेक्शन वाइरल जुनोसिस हेनीपवाईरस जीनस का होता है और जो मनुष्य और जानवर दोनों में संक्रमण कर सकता है। यह पहली बार टेरोपोडाई फॅमिली के फ्रूट चमगादड़ में पहचाना गया जो इस वाइरस के प्राकृतिक होस्ट होते हैं। मनुष्यों में 582 तरह के NIV संक्रमण में 54 प्रतिशत अत्यंत खतरनाक और घातक होते हैं।
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Symptoms of NVI (Nipah Virus Infection)

इन्फेक्शन के 3 से 14 दिनों के भीतर इसके लक्षण दिखने लगते हैं। मरीज को प्रारंभ में तेज बुखार,सरदर्द और नींद आने लगती है जो बाद में मस्तिष्क ज्वर या दिमागी असंतुलन में परिवर्तित हो जाता है। लक्षण तेजी से बदलते हुए कोमा की स्थिति भी आ जाती है।

Treatment of Nipah Virus Infection

NVIका अब तक कोई इलाज नहीं ढूढ़ा जा सका है। बचाव ही इसका सबसे बढ़िया इलाज है। जितने भी NVI  सस्पेक्टेड मरीज हो उनका इलाज अलग रख कर किया जाना चाहिए। किसी भी स्वस्थ मनुष्य को उनके संपर्क में नहीं आने देना चाहिए। NVI मरीजों को इंटेंसिव सपोर्टिव केयर में रखा जाता है। यद्यपि इसकी कोई दवा अभी तक नहीं बनी है तो भी एंटी मलेरियल ड्रग क्लोरोक्विन को कुछ हद तक इसमें प्रभावी देखा गया है जो निपाह वाइरस को परिपक्व नहीं होने देता। हालाँकि एक मोनोक्लोनल एंटी बॉडी का निर्माण ऑस्ट्रेलिया में किया गया है पर वह अभी परिक्षण की अवस्था में है।  इसके अलावा रिबवेरिन के रिजल्ट कुछ उम्मीद बढ़ाते हैं किन्तु अभी तक मनुष्यों में इसका परिक्षण नहीं किया गया है।
चुकि अभी तक इसका कोई इलाज नहीं खोजा जा सका है अतः इसके रोकथाम के लिए कुछ और उपाय अपनाने की जरुरत है। इससे बचाव के लिए चमगादड़ और बीमार सूअरों को मानव क्षेत्र से दूर रखना चाहिए। ताड़ी जो चमगादड़ द्वारा चखा गया हो या उसमे चमगादड़ का मल,मूत्र  गिरा हो, पक्षियों  खासकर चमगादड़ के जूठे फल आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
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Prevention from NVI

निपाह वाइरस से संक्रमित मरीज के इलाज के लिए विशेष प्रशिक्षित स्टाफ होने चाहिए। उनके पास खुद के बचने के लिए उचित मास्क और दस्ताने, जूते और विशेष यूनिफार्म होना चाहिए। ताड़ी, सूअर इत्यादि को रिहाइशी इलाकों से एकदम हटा देना चाहिए। 

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