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Cease Fire Aur LOC

Cease Fire Kya Hai 
टीवी पर समाचारों के दौरान जब भी भारत और पाकिस्तान की बात होती  है तो एक टॉपिक अकसर चर्चा में रहता है और वह टॉपिक है सीज़ फायर। अकसर सीज़ फायर के उलंघन की खबरें आती हैं। आइए देखते हैं सीज़ फायर किसे कहते हैं।
सीज फायर दो देशों के बीच एक ऐसा समझौता होता जिसके अंतर्गत दोनों देश एक दूसरे की सेना या सीमा पर कोई गोली नहीं चलाते। यह समझौता प्रायः दो देशों या सेनाओं के बीच किसी युद्ध के बाद किया जाता है। कई बार सीमा पर तनाव की स्थिति में जब युद्ध की नौबत आ जाती है तब युद्ध को रोकने या टालने के लिए इस तरह का समझौता होता है जिसमे दोनों देशों के प्रतिंनिधि उस युद्ध को रोकने या टालने के लिए इस तरह का समझौता करते है। इसे सीज़फायर या युद्ध विराम कहा जाता हैं। अकसर यह समझौते के रूप में औपचारिक संधि के द्वारा किया जाता है पर यह बिना औपचारिक संधि के भी हो सकता है।
कई बार दो देश युद्ध के बाद ऐसी स्थिति में पहुंच जाते है कि दोनों में से किसी को जीत हासिल नहीं होती दिखती फिर भी वे आपसी समझौता नहीं करने को तैयार होते हैं। ऐसी स्थिति में अस्थाई रूप से युद्ध रोकने के लिए दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम हो जाता है और दोनों के बीच की जगह सीज़ फायर लाइन बन जाती है। भारत और पाकिस्तान के बीच इसी तरह का सीज़ फायर है। उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच भी इसी तरह से सीज़ फायर  की स्थिति बनी हुई है। सीज़ फायर वास्तव में कोई स्थाई समाधान नहीं होता। 

एल ओ सी (LOC ) क्या है

भारत और पाकिस्तान के बीच  1947 में जो बटवारा हुआ उसमे दोनों देशों के बीच एक अंतराष्ट्रीय सीमा तय की गयी थी और जिस रेखा के द्वारा दोनों में विभाजन हुआ उसे रेड क्लिफ रेखा का नाम दिया गया। किन्तु भारत की आज़ादी के तुरत बाद 1947 में ही पाकिस्तान ने भारत पर हमला बोल दिया था। यह हमला कश्मीर के कई भागों में किया गया था। भारतीय सेना द्वारा इसका मुहतोड़ जवाब दिया गया और पाकिस्तानी सेना को करगिल सेक्टर के पीछे श्रीनगर लेह राजमार्ग तक पछाड़ दिया गया था। उसी समय युद्ध नियंत्रित कर दोनों देशों के बीच तात्कालीन स्थिति में एक रेखा खींची गयी थी जिसे LOC अर्थात लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल या नियंत्रण रेखा कहा जाता है। यह वास्तव में भारत और पाकिस्तान के बीच 740 किलोमीटर लम्बी रेखा है जिसे एक तरह से भारत और पाकिस्तान का वर्तमान अस्थायी बॉर्डर भी कह सकते हैं। 1965 और 1971  के युद्ध के  बाद इस रेखा के दोनों  ओर  की चौकिओं को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। बाद में 1972 में शिमला समझौते इसे LOC यानि नियंत्रण रेखा मान लिया गया था और  तब से कमोवेश यही स्थिति बनी हुई है।


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