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Virtual ID Kya Hai

कुछ समय पहले समाचारों में एक खबर आयी थी कि महज 500 रुपये देकर किसी का भी आधार डाटा ख़रीदा जा सकता है। एक और खबर आयी थी कि कुछ वेब साइट्स ऐसे हैं जहाँ से किसी का भी आधार डाटा डाउनलोड किया जा सकता है। दोनों खबरें न केवल चौकाने वाली थी बल्कि डराने वाली भी थी। हमारा बैंक अकाउंट , राशन कार्ड ,पैन कार्ड , मोबाइल नंबर ,गैस कनेक्शन और भी न जाने क्या क्या सब के सब आधार नंबर से जुड़ चुके हैं। कहीं से भी कोई लीक हमारी सारी सूचनाओं को ,हमारे सारे इम्पोर्टेन्ट डाक्यूमेंट्स को खतरे में डाल सकता है। ऐसे में UIDAI ने एक बड़ा फैसला लिया। ऐसी व्यवस्था की गयी कि केवल 5000 कर्मचारी ही आधार की डिटेल को एक्सेस कर सकते हैं। लेकिन यह कदम पर्याप्त नहीं था। अतः सरकार ने एक और फैसला लिया सभी आधार नम्बरों की वर्चुअल क्लोनिंग का जिसमे यूजर को पूरी सूचना न देकर केवल कुछ सिमित सूचनाएं मिले जैसे नाम,पता,फोटो आदि यानि केवल वही सूचनाएं जो उस समय यूजर के लिए जरुरी हो। इसी वर्चुअल क्लोनिंग को जो एक सोलह अंक का नंबर होता है,वर्चुअल आईडी कहते हैं।

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Virtual ID क्या है:

वर्चुअल आईडी हमारे आधार नंबर का ही एक क्लोन होता है जो सोलह डिजिट का होता है। इसके द्वारा यूजर केवल उन्ही सूचनाओं को पा सकता है जो उसके लिए उस समय जरुरी हो। जैसे मोबाइल कनेक्शन लेते समय सर्विस प्रोवाइडर को कस्टमर के नाम,एड्रेस,और फोटो की आवश्यकता होती है तो उसे वर्चुअल आईडी से वही सूचनाएं प्राप्त होंगी। वर्चुअल आईडी का समय सीमित होता है ज्यादातर यह एक दिन के लिए होगी। अर्थात अगले दिन उस आईडी से वे सूचनाएं नहीं मिल पाएंगी जो पिछले दिन मिली थी। अगर फिर से सूचनाएं चाहिए होंगी तो फिर नयी वर्चुअल आईडी जेनेरेट करनी होगी। यह अस्थायी होती है और इसे कई बार जेनेरेट किया जा सकता है। अगली आईडी बनते ही पिछली आईडी इनवैलिड हो जाएगी।

Virtual ID क्यों सुरक्षित है:


वर्चुअल आईडी की कुछ खास बातें उसे ज्यादा सुरक्षित बनाती हैं :
  • वर्चुअल आईडी से यूजर कस्टमर की केवल कुछ जानकारिओं को प्राप्त कर सकता है जैसे उसका नाम,पता,फोटो इत्यादि। 
  • वर्चुअल आईडी में आधार नंबर गुप्त रहता है यूजर को उसकी जानकारी नहीं रहती है। 
  • वर्चुअल आईडी एक अस्थायी नंबर होता है अर्थात इसका प्रयोग बहुत कम समय के लिए किया जा सकता है। अगली बार प्रयोग के लिए फिर से नयी आईडी जेनेरेट करनी पड़ेगी। 
  • अगली वर्चुअल आईडी जेनेरेट होते ही पहली आईडी इनवैलिड हो जाएगी जिससे उसका मिसयूज होने की संभावना बहुत ही काम होगी। 
Virtual ID कैसे जेनेरेट करते हैं :

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अभी तक प्राप्त जानकारियों के आधार पर कहा जा रहा है कि वर्चुअल आईडी  दो तरह से जेनेरेट किया जा सकता है  
  • UIDAI के वेब साइट पर जा कर : UIDAI के वेब साइट पर वर्चुअल आईडी जेनेरेट करने का एक ऑप्शन होगा जिसमे अपना आधार नंबर डालना होगा , इसके बाद इसे सबमिट करने पर संभवतः आपके मोबाइल पर 16 अंक का वर्चुअल आईडी आ जायेगा। 
  •  mAdhar Android Mobile App : वर्चुअल आईडी की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए UIDAI एक app लांच करने जा रही है जिसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। 
वर्चुअल आईडी एकदम अपने शैशव अवस्था में है। इसकी असली परीक्षा तब होगी जब यह भारत के 119 करोड़ आधार कार्ड धारक अपनी जरूरतों के लिए इसका प्रयोग शुरू कर देंगे और तब भी उनका डाटा सुरक्षित रहे, कोई मिसयूज या डाटा चोरी न हो सके। सरकार को अपने सेफ्टी उपायों को समय समय पर अपडेट करना पड़ेगा।  

Virtual ID कब से लांच होगा :

अभी तक की अपडेट के अनुसार वर्चुअल आईडी एक मार्च से शुरू होनी थी और एक जून से सारी कम्पनियों को इसे इम्प्लीमेंट करना था। किन्तु अभी तक सरकार की तरफ से अभी तक इसके लागु होने की कोई सुचना नहीं है। 
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