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POCSO Act Kya Hai

बच्चों के साथ आये दिन छेड़छाड़,मोलेस्टेशन,रेप की घटनाये जिस हिसाब से बढ़ी हैं वह न केवल सभ्य समाज के ऊपर धब्बा है बल्कि वह हमारे समाज की अदृश्य परन्तु अनिवार्य सुरक्षा व्यवस्था जो की नैतिक मूल्यों के रूप में संस्कारों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे डीएनए में उपस्थित रहती थी उसको भी तार तार किया है। बच्चें घर हो या बाहर हमेशा दिमाग में डर बना रहता है। बच्चों की मासूमियत और अज्ञानता का लाभ उठाकर कुंठित मानसिकता वाले लोग अकसर उन्हें अपना शिकार बना लेते हैं।

POCSO Act kya hai     What is the full form of  POCSO

बच्चों के साथ इस तरह की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2012 एक विशेष कानून को पारित किया जिसे POCSO यानि प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल आफेंसेज एक्ट (Protection of children from sexual offences act) नाम दिया गया। पोक्सो एक्ट 2012 बच्चों के प्रति यौन उत्पीड़न, यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे जघन्य अपराधों से बचाव के लिए  महिला और बाल विकास के द्वारा लाया गया था। इसे 19 जून 2012 को राष्ट्रपति से मंजूरी मिली और 20 जून 2012 को भारत के गैज़ेट में अधिसूचित कर लिया गया।
POCSO एक्ट के अंतर्गत वे सभी केस आएंगे जिसमे पीड़ित की उम्र 18 वर्ष से कम हो। इस एक्ट का उद्देश्य पीड़ित बच्चों को एक ऐसा जुडिशल वातावरण प्रदान करना है जिसमे वह निर्भय होकर अपनी बात रख सके। उसे दोस्ताना माहौल में एक बंद कमरे में कैमरे के सामने सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया जाये, सुनवाई के दौरान उसके माता पिता या वह व्यक्ति जिसपर वह भरोसा करता हो ,उपस्थित रहे तथा पीड़ित की पहचान गुप्त रक्खी जाये।

What is POCSO 2018 Amendment

पोक्सो एक्ट 2012 अपने विशेष प्रावधानों के बावजूद अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो पाया। इस एक्ट के बावजूद बच्चों से रेप और अन्य सेक्सुअल अपराध होते रहे। अभी हाल की घटनाओं ने सरकार को मजबूर किया कि इस एक्ट में कुछ और सुधार लाये। सरकार ने एक नया प्रस्ताव  लाया जिसे अप्रैल में मंजूरी मिल गयी। अब सरकार इसके लिए एक अध्यादेश लाएगी। इस बदलाव के अनुसार 12 वर्ष तक की बच्चिओं के साथ बलात्कार के मामले में मौत की सजा का प्रावधान किया गया है।

इस एक्ट की मुख्य बातें निम्न हैं :


  • यह अपराध पुरे भारत में लागू होगा जिसमे 18 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति के साथ हुए यौन अपराधों के खिलाफ संरक्षण प्रदान करता है। 
  • इस कानून के तहत सुनवाई एक विशेष न्यायलय में बच्चे के मातापिता या कोई अन्य सम्बन्धी के सामने होगी जिस पर बच्चा भरोसा करता हो। 
  • समस्त कार्रवाई बंद कमरे में कैमरे के सामने दोस्ताना माहौल में होगी।
  • बच्चों से यौन उत्पीड़न के समस्त मामले अर्थात पेनेट्रेटिव और नॉन पेनेट्रेटिव उत्पीड़न, अश्लील साहित्य, मोलेस्टेशन इत्यादि सभी मामले इसी कानून के तहत सुने जायेंगे। 
  • इस एक्ट के तहत हर उस नागरिक का जिसे घटना की जानकारी हो,कर्तव्य है कि उस घटना को पुलिस में रिपोर्ट करावे। यदि वह ऐसा नहीं करता है तो उसे कम से कम 6 माह की जेल हो सकती है। 
  • पुलिस की यह ड्यूटी है कि अधिकतम 30 दिनों के भीतर बच्चे का बयान दर्ज और साक्ष्य जमा  करे। 
  • विशेष न्यायलय को एक वर्ष के अंदर मुक़दमे की सुनवाई कर लेनी होगी।   
  • यदि बच्चा मानसिक रोगी हो अथवा इस तरह का अपराध सशस्त्र बल या सुरक्षा बल या विभाग के  सरकारी कर्मचारी टीचर,डॉक्टर या अन्य स्टाफ के द्वारा किया गया हो तो इसे काफी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। 
  • किसी तरह के झूठे आरोप या गलत सूचना के लिए इस कानून में सजा का भी प्रावधान है।  
  • रेप के मामले में सजा 7 वर्ष से बढाकर 10 वर्ष कर दिया गया है। 
  • 16 वर्ष से काम उम्र की महिलाओं के साथ बलात्कार में यह सजा कम से कम 20 वर्ष की होगी। 
  • 12 वर्ष से कम के बच्चों के साथ हुए बलात्कार में कम से कम 20 वर्ष सश्रम कारावास और अधिकतम मौत की सजा या आजीवन कारावास का प्रावधान है। 
  • जांच को अधिकतम दो महीनो के भीतर पूरा करना अनिवार्य होगा। 
  • 16 वर्ष से कम उम्र की बच्चिओं से रेप के मामले में कोई अग्रिम जमानत नहीं होगी। 
2012  से 2016 के बीच इस कानून के तहत 6118 मामले दर्ज किये गए थे जिसमे केवल 2 प्रतिशत को ही सजा मिल पाई है जबकि 85 प्रतिशत मामले अभी तक लंबित हैं। हालाँकि  POCSO 2018 में कुछ नए सुधार किये गए हैं  फिर भी अभी बहुत से सुधार करने होंगे साथ ही साथ इनको जमीनी स्तर पर इम्प्लेंट करना होगा नहीं तो इसका लाभ पीड़ितों को नहीं मिल पायेगा और अपराधिओं के हौसले बुलंद रहेंगे। साथ ही हमें अपने बच्चों की हर हरकतों पर ध्यान देना होगा  उनमे आये बदलाव को पहचानना होगा,उन्हें प्यार से गुड टच बैड टच के अंतर को  समझाना होगा। 



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