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Krodh: The Source Of Unlimited Energy


एक बार गाँधी जी दक्षिण अफ्रीका एक मुकदमे के सिलसिले में गए। वहां एक बार वे ट्रैन से सफर कर रहे थे। वे फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट में बैठे हुए थे। तभी उस डिब्बे में एक अंग्रेज आया उसने गाँधी जी को फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट में बैठे देखा तो उन्हें उतर जाने को कहा।  गाँधी जी ने कहा कि उनके पास फर्स्ट क्लास का टिकट है। इस पर उस अंग्रेज ने टीटी को बुलाया और फिर दोनों ने उनसे अपना डिब्बा चेंज करने को कहा। गाँधी जी ने मना कर दिया। उन्होंने कहा जब उनके पास वैध टिकट है तो फिर वे डिब्बा क्यों चेंज करें। इस पर टीटी ने उन्हें धक्के मार कर ट्रैन से उतार दिया। गाँधी जी ट्रैन से गिर पड़े। ट्रैन चली गयी।
अरुणिमा सिन्हा को कौन नहीं जानता। एक बार वे ट्रैन से दिल्ली जा रही थीं। ट्रैन में कुछ लुटेरे घुस आये और उनसे भी छिना झपटी करने लगे। उन्होंने विरोध किया तो वे उन्हें ट्रैन से नीचे फेक दिए। उन्हें काफी चोट आयी और वो दूसरी पटरी पर जा गिरी। उस पटरी पर आने वाली दूसरी ट्रेनों से उनका पैर कट गया। वे रात भर वहां पड़ी रही एक के बाद एक रात भर में दर्जनों ट्रेने उनपर से गुजरीं। सुबह गांव वालों ने देखा तो उन्हें अस्पताल ले गए। जहाँ से फिर उन्हें आल इंडिया मेडिकल इंस्टिट्यूट दिल्ली लाया गया और महीनो के इलाज के बाद वे जब निकलीं तो उनका पैर कट चूका था वे बैसाखी पर थीं।
दशरथ मांझी, एक ऐसा शख्स जिसने अकेले पहाड़ काट कर रास्ता बना दिया। एक बार दशरथ की बीबी बीमार पड़ी। उसे दवा और इलाज के लिए शहर ले जाना था। शहर वहां से ज्यादा दूर नहीं था पर बीच में पहाड़ होने की वजह से उसे काफी घूम के जाना पड़ा। इस घुमाव की वजह से अस्पताल पहुंचने में उसे काफी समय लग गया। ज्यादा समय लगने की वजह से उसकी बीबी मर गयी।
तीनो अलग अलग कहानियां हैं पर तीनो में एक चीज़ जो कॉमन है वह अपमान,दुःख  और गुस्सा। आप अपने को उनकी जगह रख के देखिये क्या आपको अपमान नहीं महसूस होता  और गुस्सा नहीं आता ? जरूर आता।  अब आईये देखते हैं उनके क्या परिणाम हुए। ट्रैन से फेके जाने के बाद गाँधी जी के जीवन का उद्देश्य ही बदल गया। उन्होंने उस अपमान और गुस्से को पॉज़िटिव एक्शन के तरफ बदल दिया और अंग्रेजों को पुरे भारत से निकलने में अपना पूरा जीवन लगा दिया और भारत को आज़ादी दिलाने में बहुत बड़ी भुमिका  निभाई।  दूसरे केस में अरुणिमा  सिन्हा अपना पैर गवाने के बाद गुमनामी में खो जाती। हो सकता है सरकार की तरफ से कुछ मदद मिल जाती और उसी से वो अपना जीवन व्यतीत करती पर क्रोध और दुःख ने उनके प्रतिशोध को हवा दी। किन्तु उन्होंने अपने इस क्रोध को सही दिशा दिया  अपने उद्देश्य में उसे ऊर्जा की तरह इस्तेमाल किया और माऊंट एवेरेस्ट पर चढ़ने वाली विश्व की पहली विकलांग महिला बन गयी। तीसरा उदहारण दशरथ मांझी का है। पत्नी की मृत्यु के बाद दुःख और क्रोध से भर कर उन्होंने ठान लिया कि जिस घुमाव की वजह से उनको अपनी पत्नी का इलाज कराने इतनी दुरी तय करनी पड़ी है और जिस वजह से उनकी पत्नी की मृत्यु हुई है उस घुमाव को ही ख़त्म कर दूंगा। उन्होंने अपने गांव और शहर के बीच के पहाड़ को अकेले ही काट कर हटा डाला और उसपर एक सड़क बना डाली। इस काम में उन्हें वर्षों लग गए ।
ऐसे हजारों उदाहरण हैं जिसमे गुस्सा,अपमान और दुःख उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गया और वे सफलता के शिखर पर पहुंच गए। जीवन में कई ऐसे पल आते हैं जिनमे हमें अपमानित होना पड़ता है ,दुःख झेलना पड़ता है और परिणाम स्वरुप हमें क्रोध आता है। अक्सर हम गुस्से का जवाब गुस्से में देते हैं और वहीँ के वहीँ झगड़ा ,मार पीट कर लेते हैं। इस प्रकार हम अपने क्रोध को शांत करते हैं। क्रोध का शांत होना जरुरी है पर क्रोध की अग्नि यानि ऊर्जा को यदि सही दिशा दे दी जाये तो चमत्कारिक परिणाम देखने को मिलते हैं। जरुरत है बस उस ऊर्जा को सही दिशा में प्रयोग करने की। यह बहुत बड़ी शक्ति होती है बहुत बड़ी प्रेरणा होती है। एकलब्य का उदहारण आपके सामने है।कालिदास,तुलसीदास को भी अपनी अपनी पत्निओं से तिरस्कार और अपमान का सामना करना पड़ा था। अम्बेडकर  को अपने जीवन में बहुत सारे अपमान का सामना करना पड़ा पर वे उस अपमान से उत्पन्न क्रोध का सही इस्तेमाल किये और परिणाम आपके सामने है।
क्रोध जीवन में जरुरी है। यह हमारे जीवन के लक्ष्य को निर्धारित कर देता है। यह हमें उस विशेष कार्य को करने के लिए प्रेरित करता है, डेडिकेट करता है। क्रोध में बड़ी ऊर्जा होती है। हमारा शरीर तमतमा जाता है नसों में रक्त प्रवाह की गति तेज हो जाती है। दिमाग लक्ष्य को छोड़ कर अन्य सारी बातों को भूल जाता है। नींद उड़ जाती है चैन छीन जाता है। भूख प्यास सब गायब हो  जाती है। अब जरुरत है इस ऊर्जा का सदुपयोग करने की।
सही दिशा देने की। जो लोग ऐसा कर पाते हैं सफलता उनके क़दमों को चूमती है। अतः इस चमत्कारिक अमीम शक्ति को पहचानिये और सही लक्ष्य बना कर उसमे झोक दीजिये। आपका जीवन बदल जायेगा,सफलता आपकी गलबहिया करेगी और आपका प्रतिशोध भी पूरा हो जायेगा।
जीवन में कई बार आपको अपमान,दुःख और क्रोध का सामना करना पड़ता है। अनावश्वक और तुच्छ चीज़ों पर यदि क्रोध आवे तो भरसक उससे बचने का प्रयास करें उसे इग्नोर करें। कभी भी अपमान ,दुःख और क्रोध का जवाब उसी तरह से मत दें अर्थात क्रोध के बदले क्रोध। आप झगड़ा कर बैठेंगे और उस अपार ऊर्जा को खो देंगे। आपका जीवन झगड़ा ,लड़ाई , शोध प्रतिशोध में ही बीत जायेगा। क्रोध या अपमान को कभी बर्दाश्त या पी के भी न रहें। अन्यथा वह ऊर्जा आपको अंदर ही अंदर जला डालेगी ,खोखला बना डालेगी , बीमार बना डालेगी। अपमान,दुःख और क्रोध को सकरात्मक बनाये उसे एक लक्ष्य दे दें और उससे उत्पन्न ऊर्जा को उसी में खर्च कर दें। यह आपको काफी दूर तक ले जायेगा।  बेहतर और बेहतर करने का प्रयास करें। 

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