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Goutam Buddha Aur Angulimal Daku

 एक बार एक जंगल में एक बहुत ही खूंखार रहता था। वह हर आने जाने वाले राहगीरों को लूट लिया करता था। लूटने के साथ साथ वह उनकी उंगलिंयां भी काट लेता था और उसकी माला बना कर पहना करता था। इसी वजह से उसका नाम उंगलीमाल पड़ गया। एक तो घना जंगल और दूसरे उस डाकू का आतंक , लोग उधर से गुजरने से काँप जाते।
एक बार की बात है गौतम बुद्ध उसी रास्ते से गुजर रहे थे।  लोगों ने उन्हें बहुत मना  किया किन्तु वे नहीं माने। चलते चलते जब वे काफी अंदर तक आ गए तो अचानक उनके सामने उंगलीमाल डाकू आ गया। आते ही वह अपने हथियारों से उन्हें डराना शुरू कर दिया । गले में उँगलियों की माला , भयंकर भेष भूषा , बड़े बड़े बाल , घनी मूँछे और ऊंची आवाज़ किसी को भी डराने के लिए काफी थी । Image result for budhaकिन्तु बुद्ध अपने चित परिचित अंदाज में उसी तरह से मुस्कुराते रहे । डाकू को बहुत ही आश्चर्य हुआ। उसने अपने जीवन में ऐसा पहली बार देखा था कि कोई उसके सामने खड़ा हो और गंभीर मुद्रा में मुस्कुरा रहा हो। उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा। उसने फिर उन्हें डराने का प्रयास किया। किन्तु बुद्ध उसी तरह  शांत बने रहे। बुद्ध के शांत ,भयहीन  और मुस्कुराते हुए चेहरे को देखकर वह भयंकर, निर्दयी और अशिष्ट डाकू अंदर ही अंदर घबराने लगा। काफी प्रयास करने के बाद भी जब गौतम बुद्ध नहीं डरे तो उसने अपनी तलवार निकाल कर कहा मैं   तुम्हारी जान ले लूंगा। गौतम बुद्ध ने कहा ठीक है जान ले लेना लेकिन जान लेने के पहले मेरा एक काम कर दो।  डाकू ने कहा ठीक है लेकिन मुझे क्या करना होगा । बुध्द ने कहा सामने के बृक्ष से एक टहनी तोड़ के लाओ। डाकू ने कहा बस इतना सा काम  और यह कह कर वह टहनी तोड़ लाया। गौतम बुद्ध ने टहनी लिया और फिर उसे  कहा जाओ अब  जहाँ से लाये हो वहां जोड़ दो। डाकू के क्रोध का ठिकाना न रहा। उसने कहा ऐसा कैसे संभव है। तब बुद्ध ने कहा जिस चीज़ को तुम जोड़ नहीं सकते हो उसे तुम्हे तोड़ने का भी कोई अधिकार नहीं है। इसी तरह जब तुम किसी को जीवन दे नहीं सकते तो तुम्हे किसी के जीवन लेने का कोई अधिकार नहीं। अब डाकू को अपनी गलती का अहसास हो गया। वह गौतम बुद्ध के पैरों में गिर पड़ा और माफ़ी मांगने लगा। बुद्ध तो महात्मा थे ही उन्होंने उसे माफ़ कर दिया और उसे बहुत सारा ज्ञान प्रदान करके उसे एक अच्छा जीवन बिताने के लिए प्रेरित कर उसका जीवन सुधार दिया। 

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RPF Aur GRP Me Kya Antar Hai

ट्रेनों से सफर के दौरान अकसर हमें पुलिस वाले दिखाई पड़ जाते हैं। कभी ट्रैन के अंदर तो कभी प्लेटफार्म पर , कभी टिकट खिड़की के पास तो कभी माल गोदाम की तरफ। स्टेशनो पर जब भी पुलिस की बात चलती है तो जीआरपी और आरपीएफ का नाम जरूर आता है। पुलिस वालों को भी देखा जाता है तो उनके कंधे पर GRP या RPF लिखा मिलता है। बहुत कन्फ्यूजन होता है और अकसर हमारे दिमाग में यह बात आती है कि इन दोनों में फर्क क्या है। पुलिस तो दोनों हैं। आइए देखते हैं जीआरपी और आरपीएफ में क्या अंतर है ?

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की सुरक्षा करना होता है। इसके अंतर्गत रेलवे परिसर में उपस्थित सारे सामान आते हैं। यह रेल मंत्रालय के प्रति जवाबदेय होता है। यह रेलवे स्टॉक , रेलवे लाइन , यार्ड , मालगोदाम इत्यादि बहुत सारी चीज़ों की सुरक्षा करता है। इन सम्…

Mumbai: Ek Laghu Bharat

मुंबई जिसे भारत का पश्चिम द्वार, भारत की आर्थिक राजधानी, सात टापुओं का नगर, सितारों की नगरी, सपनो का शहर, एक ऐसा शहर जहाँ रात नहीं होती आदि कई नामों से पुकारा जाता है, न केवल भारत का सर्वाधिक जनसँख्या वाला शहर है बल्कि यह दुनिया के सर्वाधिक जनसँख्या वाले शहरों में दूसरा स्थान रखता है और अनुमान है 2020 तक यह विश्व का सबसे अधिक जनसँख्या वाला शहर बन जाएगा। यह नगर वास्तव में भारत के समृद्धत्तम नगरों में से एक है। भारत के सबसे अमीर लोगों का निवास स्थान यहीं है और भारत के जीडीपी का पांच प्रतिशत हिस्सा यहीं से आता है। भारत के प्रति व्यक्ति की आय के मुकाबले मुंबई के प्रति व्यक्ति की आय तिगुनी है। यह भारत के सबसे अधिक गगनचुम्बी इमारतों वाला शहर है।



मुंबई की स्थापना और इतिहास

मुंबई का इतिहास बहुत पुराना जान पड़ता है।  कांदिवली के निकट पाषाण काल के मिले अवशेष यहाँ उस युग में भी मानव बस्ती होने की गवाही देते हैं। ई पूर्व 250 में जब इसेहैपटनेसिआ कहा जाता था तब के भी यहाँ  लिखित प्रमाण मिले हैं। ईशा पूर्व तीसरी शताब्दी में यहाँ सम्राट अशोक का शासन रहा फिर सातवाहन से लेकर इंडो साइथियन वेस्टर्न स्ट्रै…

Uric Acid: Lakshan Aur Niyantran Ke Upay Hindi Me

यूरिक एसिड और गाउट /अर्थराइटिस 

कई बार ऐसा होता है कि कुछ लोगों को चलने फिरने में काफी तकलीफ का सामना करना पड़ता है और उनके शरीर के जोड़ जोड़ में दर्द होता है। गांठे सूज जाती हैं और वह करीब करीब बेड पर हो जाता है। यह बीमारी काफी तकलीफदायक है क्योंकि यह सीधे मनुष्य के खड़े होने , चलने फिरने पर प्रभाव डालता है और इस वजह से वह लाचार और काफी हद तक दूसरों पर निर्भर हो जाता है। 
आइए जानते हैं ऐसा किन वजहों से होता है और कैसे इसका निदान करते हैं : मनुष्य के शरीर में विभिन्न उपापचयी क्रियाओं के पश्चात यूरिक एसिड का निर्माण होता है। जब किसी कारणवश शरीर में इसकी मात्रा बढ़ जाती है तब यह शरीर पर अपना नुकसान दिखाना शुरू करती है।  यूरिक एसिड या गठिआ क्या है What is Uric Acid
यूरिक एसिड कार्बन,हाइड्रोजन,नाइट्रोंजन तथा ऑक्सीजन परमाणुओं का एक हेट्रोसिक्लिक योगिक होता है जो शरीर के अंदर विभिन्न उपापचयी क्रियाओं के पश्चात् प्यूरिन के रूप में उत्पन्न होता है।इसी प्यूरिन के टूटने से यूरिक एसिड का निर्माण होता है।  जब हमारे शरीर में इसकी मात्रा सामान्य से अधिक हो जाती है तो इसे Hype