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Casting Couch Kya Hota Hai Hindi Me

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फ़िल्मी दुनिया की चकाचौंध ऐसी है कि हर कोई बरबस खींचा चला आता है। कौन नहीं चाहता उसका नाम हो, शोहरत हो,ढेर सारा पैसा हो,ऐशो आराम हो,नौकर हो चाकर हों,गाड़ियां हों ? यही चाहत नए उभरते हुए कलाकारों को फ़िल्मी दुनिया की ओर आकर्षित करता है और वे अपना मुकाम बनाने के लिए इस फिल्म नगरी का रुख करते हैं। हर वर्ष हज़ारों की तादाद में लोग इस ख्वाहिश को लेकर मुंबई आते हैं। इनमे पहले के स्ट्रगलरों को भी जोड़ लिया जाये  तो ये संख्या अच्छी खासी हो जाती है।
काम पाने की होड़ में कई बार उन्हें कई तरह के समझौते भी करने पड़ते हैं। इसी क्रम में कई बार काम दिलाने के लिए उनसे शारीरिक सम्बन्ध भी बनाने की डिमांड की जाती है।

Casting Couch Kya hai 

कास्टिंग काउच शब्द वास्तव में फिल्म निर्माताओं के ऑफिस में लगे हुए काउच यानि सोफे से निकला हुआ है जिस पर बैठ कर वे अपनी फिल्म के लिए अभिनेता या अभिनेत्रिओं को कास्ट करते हैं। वर्तमान में कास्टिंग काउच के सन्दर्भ बदल गए हैं। कास्टिंग काउच फिल्म निर्माताओं के द्वारा फिल्मों में काम दिलाने के ऐवज  में शारीरिक सम्बन्ध बनाने की डिमांड के सन्दर्भ में प्रयोग होता है। कई बार निर्माता या सम्बंधित व्यक्ति नयी लड़कियों से इस तरह की अनैतिक मांग करते हैं। कई बार मांग पूरा नहीं करने पर या तो उन्हें काम ही नहीं दिया जाता या उनके रोल को छोटा या अमहत्वपूर्ण कर दिया जाता हैं।
कई बार तो काम शुरू करने के बाद उन्हें फिल्म से सिर्फ इसी वजह से निकाल दिया जाता है कि उसने इस तरह की डिमांड को मना कर दिया। आज की तारीख में कास्टिंग काउच का चलन फिल्मों से इतर कई अन्य क्षेत्रों में भी हो रहा है जहाँ लड़कियों से काम दिलाने के नाम पर या प्रमोशन के नाम पर यौन सम्बन्ध बनाने डिमांड की जाती है।

Indian Film Industry Aur Casting Couch


फिल्मों में  कास्टिंग काउच का चलन काफी पुराना है। समय समय पर कई अभिनेत्रिओं ने इस बात को स्वीकारा कि उन्हें कास्टिंग काउच के लिए कहा गया था। कंगना रनौत ने अपने एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया था कि शुरुवाती दौर में एक फिल्म के लिए उनसे इस तरह की डिमांड की गयी थी। ममता कुलकर्णी ने निर्माता राज कुमार संतोषी पर कुछ इसी तरह के आरोप लगाए थे। शक्ति कपूर को एक स्टिंग ऑपरेशन में फिल्मों में रोल दिलाने के लिए इस तरह की हरकत करते हुए दिखाया गया था। अभी हाल ही में साउथ की अभिनेत्री श्री रेड्डी ने बीच सड़क पर अपने कपडे उतार कर इस तरह के चलन का विरोध किया था। मशहूर कोरिओग्राफर सरोज खान ने भी अपने एक इंटरव्यू में यह कह कर इस पर मुहर लगाई कि  फिल्मों में कास्टिंग काउच होता है तो दो रोटी भी मिलती है। अभी हाल ही में कॉग्रेस की नेता रेणुका चौधरी ने कहा कि संसद तथा अन्य जगहों में जाने के लिए भी कास्टिंग काउच का सामना करना पड़ता है। 
कास्टिंग काउच फिल्म इंडस्ट्री के ऊपर एक ऐसा धब्बा है जो उसकी चमक दमक को न केवल फीका करता है बल्कि कई अभिनेत्रिओं के जीवन में ग्रहण की तरह या तो उनके करियर को तबाह कर देता है या कामयाब होने के बावजूद उनके एहसासों को एक अपराधबोध की फीलिंग के तले दबाये रखता है।  

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