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Showing posts from April, 2018

POCSO Act Kya Hai

बच्चों के साथ आये दिन छेड़छाड़,मोलेस्टेशन,रेप की घटनाये जिस हिसाब से बढ़ी हैं वह न केवल सभ्य समाज के ऊपर धब्बा है बल्कि वह हमारे समाज की अदृश्य परन्तु अनिवार्य सुरक्षा व्यवस्था जो की नैतिक मूल्यों के रूप में संस्कारों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे डीएनए में उपस्थित रहती थी उसको भी तार तार किया है। बच्चें घर हो या बाहर हमेशा दिमाग में डर बना रहता है। बच्चों की मासूमियत और अज्ञानता का लाभ उठाकर कुंठित मानसिकता वाले लोग अकसर उन्हें अपना शिकार बना लेते हैं।

POCSO Act kya hai     What is the full form of  POCSO

बच्चों के साथ इस तरह की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए केंद्र सरकार ने 2012 एक विशेष कानून को पारित किया जिसे POCSO यानि प्रोटेक्शन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल आफेंसेज एक्ट (Protection of children from sexual offences act) नाम दिया गया। पोक्सो एक्ट 2012 बच्चों के प्रति यौन उत्पीड़न, यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे जघन्य अपराधों से बचाव के लिए  महिला और बाल विकास के द्वारा लाया गया था। इसे 19 जून 2012 को राष्ट्रपति से मंजूरी मिली और 20 जून 2012 को भारत के गैज़ेट में अधिसूचित कर लिया गया।
POCSO एक्ट के …

RPF Aur GRP Me Kya Antar Hai

ट्रेनों से सफर के दौरान अकसर हमें पुलिस वाले दिखाई पड़ जाते हैं। कभी ट्रैन के अंदर तो कभी प्लेटफार्म पर , कभी टिकट खिड़की के पास तो कभी माल गोदाम की तरफ। स्टेशनो पर जब भी पुलिस की बात चलती है तो जीआरपी और आरपीएफ का नाम जरूर आता है। पुलिस वालों को भी देखा जाता है तो उनके कंधे पर GRP या RPF लिखा मिलता है। बहुत कन्फ्यूजन होता है और अकसर हमारे दिमाग में यह बात आती है कि इन दोनों में फर्क क्या है। पुलिस तो दोनों हैं। 
RPF aur GRP ka full form kya hota hai 

RPF का फुलफॉर्म होता है Railway Protection Force यानि रेलवे सुरक्षा बल जबकि GRP का फुलफॉर्म होता है Government Rail Police 

RPF Aur GRP Me Kya Antar Hai

RPF यानि रेलवे सुरक्षा बल एक सैन्य बल है जो सीधे ministry of railway के अंतर्गत आता है। इसका मुख्या कार्य रेलवे परिसम्पत्तिओं 
की सुरक्षा करना होता है। इसके अंतर्गत रेलवे परिसर में उपस्थित सारे सामान आते हैं। यह रेल मंत्रालय के प्रति जवाबदेय होता है। यह रेलवे स्टॉक , रेलवे लाइन , यार्ड , मालगोदाम इत्यादि बहुत सारी चीज़ों की सुरक्षा करता है। इन सम्पतिओं को नुकसान पहुंचाने ,चोरी करने वाले व्यक्तिओ…

Casting Couch Kya Hota Hai

फ़िल्मी दुनिया की चकाचौंध ऐसी है कि हर कोई बरबस खींचा चला आता है। कौन नहीं चाहता उसका नाम हो, शोहरत हो,ढेर सारा पैसा हो,ऐशो आराम हो,नौकर हो चाकर हों,गाड़ियां हों ? यही चाहत नए उभरते हुए कलाकारों को फ़िल्मी दुनिया की ओर आकर्षित करता है और वे अपना मुकाम बनाने के लिए इस फिल्म नगरी का रुख करते हैं। हर वर्ष हज़ारों की तादाद में लोग इस ख्वाहिश को लेकर मुंबई आते हैं। इनमे पहले के स्ट्रगलरों को भी जोड़ लिया जाये  तो ये संख्या अच्छी खासी हो जाती है।
काम पाने की होड़ में कई बार उन्हें कई तरह के समझौते भी करने पड़ते हैं। इसी क्रम में कई बार काम दिलाने के लिए उनसे शारीरिक सम्बन्ध भी बनाने की डिमांड की जाती है।
Casting Couch Kya hai 

कास्टिंग काउच शब्द वास्तव में फिल्म निर्माताओं के ऑफिस में लगे हुए काउच यानि सोफे से निकला हुआ है जिस पर बैठ कर वे अपनी फिल्म के लिए अभिनेता या अभिनेत्रिओं को कास्ट करते हैं। वर्तमान में कास्टिंग काउच के सन्दर्भ बदल गए हैं। कास्टिंग काउच फिल्म निर्माताओं के द्वारा फिल्मों में काम दिलाने के ऐवज  में शारीरिक सम्बन्ध बनाने की डिमांड के सन्दर्भ में प्रयोग होता है। कई बार निर्माता…

Krodh: The Source Of Unlimited Energy

एक बार गाँधी जी दक्षिण अफ्रीका एक मुकदमे के सिलसिले में गए। वहां एक बार वे ट्रैन से सफर कर रहे थे। वे फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट में बैठे हुए थे। तभी उस डिब्बे में एक अंग्रेज आया उसने गाँधी जी को फर्स्ट क्लास कम्पार्टमेंट में बैठे देखा तो उन्हें उतर जाने को कहा।  गाँधी जी ने कहा कि उनके पास फर्स्ट क्लास का टिकट है। इस पर उस अंग्रेज ने टीटी को बुलाया और फिर दोनों ने उनसे अपना डिब्बा चेंज करने को कहा। गाँधी जी ने मना कर दिया। उन्होंने कहा जब उनके पास वैध टिकट है तो फिर वे डिब्बा क्यों चेंज करें। इस पर टीटी ने उन्हें धक्के मार कर ट्रैन से उतार दिया। गाँधी जी ट्रैन से गिर पड़े। ट्रैन चली गयी।
अरुणिमा सिन्हा को कौन नहीं जानता। एक बार वे ट्रैन से दिल्ली जा रही थीं। ट्रैन में कुछ लुटेरे घुस आये और उनसे भी छिना झपटी करने लगे। उन्होंने विरोध किया तो वे उन्हें ट्रैन से नीचे फेक दिए। उन्हें काफी चोट आयी और वो दूसरी पटरी पर जा गिरी। उस पटरी पर आने वाली दूसरी ट्रेनों से उनका पैर कट गया। वे रात भर वहां पड़ी रही एक के बाद एक रात भर में दर्जनों ट्रेने उनपर से गुजरीं। सुबह गांव वालों ने देखा तो उन्हें अस…

What is the fullform of NRI, NRI Kise Kahte Hain

NRI किसे कहा जाता है 

सदिओं से बहुत सारे भारतवासी व्यापार ,नौकरी या अन्य उद्देश्यों से भारत से बाहर पुरे विश्व में जाते रहे हैं। धीरे धीरे वे वहां के बाशिंदे हो गए और वहीँ की नागरिकता ले ली। वे उन देशों में बसे तो जरूर पर अपनी पहचान अपनी संस्कृति , अपना दर्शन बनाये और बचाये रखे। वे भावनात्मक रूप से भारत से जुड़े रहे। ऐसे ही भारतीयों  को NRI कहा जाता है। 
भारतीय उपमहाद्वीप से यहाँ के लोगों का विदेशों में जाना और बसना कई कारणों से हुआ है। प्राचीन काल से ही  राज्य विस्तार,धर्म प्रचार , मजदूरी , व्यापार , नौकरी , शिक्षा इत्यादि के लिये लोग विभिन्न देशों का रुख किये। दक्षिण भारत के राजाओं के द्वारा कम्बोडिआ, इंडोनेशिया आदि देशों में राज्य  विस्तार हुआ जिसमे बहुत सारे लोगों का पलायन हुआ।फिर  बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार के लिए भी भारत से लोग विश्व के कई देशों में गए। अंग्रेजों के शासन काल में बिहार तथा उत्तरप्रदेश के मजदूरों को जिन्हे गिरमिटिआ भी कहा जाता था उन्हें अंग्रेजों द्वारा खेती और मजदूरी के लिए उनके औपनिवेशिक देशों में ले जाया गया जहाँ वे बस गए। आजादी के बाद शिक्षा,व्यापार  तथा नौकरी क…

Media Trial Kya Hota Hai

भारत एक लोकतान्त्रिक देश है और प्रेस या मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है। कहा जाता है कि एक मजबूत लोकतंत्र के लिए उस देश की मीडिया को न केवल सशक्त होना चाहिए बल्कि स्वतंत्र भी होना चाहिए। हमारे देश में मीडिया की स्वतंत्रता संविधान के 19  १(e )अनुच्छेद के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से ली जाती है हालाँकि संविधान के उसी अनुच्छेद के दूसरे उपबंध में इस स्वतंत्रता को भी सीमित किया गया है। तो भी ब्रेकिंग न्यूज़ के दौर और होड़ में ख़बरों के तह तक पहुंचने की मज़बूरी या टीआरपी  का लॉलीपॉप हो , मीडिया कई बार अपनी सीमाएं लाँघ जाता है। मीडिया को समाज और देश का प्रहरी भी कहा जाता है. समाज में जब भी अन्याय या कोई अपराध होता है तो यही मीडिया सच दिखाने के साथ साथ उस अन्याय या अपराध के खिलाफ जनता का प्रतिनिधि बन कर दोषिओं के खिलाफ मजबूत आवाज़ उठाता है और नौकरशाह हो या सत्तापक्ष उन्हें सख्त से सख्त कदम बिना लापरवाही के उठाने को मजबूर कर देता है। इसी वजह से जनता के दिमाग में मीडिया की छवि ऐसी बनती है कि उनकी हर बात को वह सचाई का दर्पण समझता है। आम जनता मीडिया में छपी या दिखाई गयी ख़बरों को रिफरेन्स …

KYC Kya Hai

जब भी आप बैंक  में खाता खुलवाने जाते हैं तो आपसे एक फॉर्म भरने को कहा जाता है जिसे KYC  कहा जाता है। इस फॉर्म के माध्यम से बैंक अपने कस्टमर के बारे में पूरी जानकारी एकत्र करता है और अपने कस्टमर के बारे में सुनिश्चित होता है। इस फॉर्म की आवश्यकता बैंक खाता खुलवाने में , लाकर लेने में , म्यूच्यूअल फंड्स खरीदने में ,बीमा लेने में,सोने की खरीदारी में ,एल पी जी कनेक्शन लेने में आदि कई जगह होती है।


KYC का फुलफॉर्म क्या है What is the full form of KYC

KYC  का फुल फॉर्म होता है know your customer यानि अपने ग्राहक को जानिए। वास्तव में इस फॉर्म के माध्यम से संस्थाएं अपने ग्राहक की पूरी डिटेल लेती हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकों के लिए इस फॉर्म भरने की प्रक्रिया को अनिवार्य बना दिया है। इस फॉर्म के माध्यम से ग्राहक के पहचान की पुष्टि होती है और किसी गलत या अपराधी किस्म के व्यक्ति का खाता नहीं खुल सकता है।

KYC के लिए किन डाक्यूमेंट्स की आवश्यकता होती है

KYC के लिए सरकार ने 6 प्रकार के डाक्यूमेंट्स को स्वीकार करने की अनुमति दी है
ड्राइविंग लाइसेंस पासपोर्ट वोटर आईडी कार्ड पैन कार्ड आधार कार्ड एन आर ज…

Gautam Buddh

एक समय की बात है गौतम बुद्ध का किसी गांव में आगमन हुआ। गौतम बुद्ध उस गांव में कुछ दिनों के लिए ठहरे। रोज़ उनके पास गांव वालों की भीड़ लगी रहती थी।  दूर दूर से लोग उनके पास आने लगे। गौतम बुद्ध उनकी बातों को ध्यान से सुनते और जो भी उचित समाधान होता उन्हें समझाते। लोग भी प्रसन्न और संतुष्ट होकर वहां से जाते।

एक दिन की बात है उनके पास एक स्त्री रोते रोते आयी। वह बिलख बिलख कर रो रही थी। गौतम बुद्ध ने उससे उसके आने का कारण पूछा। उसने बताया कि उसके  एकलौते  पुत्र की मृत्यु हो गयी है। उसने यह भी बताया कि उस पुत्र के सिवा इस दुनिया में उसका कोई नहीं है। वह बुद्ध के पैरों में गिर गयी और उनसें उसे जीवित करने की प्रार्थना करने लगी। गौतम बुद्ध ने उसे बहुत समझाया कि यह असंभव है जिसकी मृत्यु हो गयी हो उसे जीवित नहीं किया जा सकता किन्तु वह औरत नहीं मानी। उसने कहा वह अपने प्राण त्याग देगी अगर उसका पुत्र जीवित न हुआ तो। गौतम बुद्ध ने अंत में उससे कहा सुनो हे स्त्री , मै तुम्हारे पुत्र को जीवित कर दूंगा लेकिन उसके पहले तुम्हे मेरा एक काम करना होगा।  स्त्री ने कहा अपने पुत्र को जीवित करने के लिए मुझे जो भी …

TRP Kya Hai

जब भी टीवी चैनलों की बात चलती है तो एक शब्द जो बराबर प्रयोग में आता है वो है टी आर पी। अभी हाल ही में श्री देवी की मृत्यु की घटना को सभी चैनलों ने दिन दिन भर कई कई दिनों तक अलग अलग एंगल से चलाया जिसकी वजह से कई अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं जो उस दौरान घटी उसको समाचार चैनलों ने नहीं कवर किया और अपने समाचार में उसको स्थान नहीं दिया। इस वजह से मीडिया की काफी आलोचना भी हुई थी। इसके पीछे कई अन्य कारणों के साथ साथ टी आर पी का भी बहुत बड़ा रोल था। श्री देवी पर न्यूज़ की टी आर पी अन्य समाचारों की टी आर पी से काफी ज्यादा थी और टीवी चैनल्स वाले समाज सेवा के लिए तो बैठे नहीं थे अतः उन्होंने व्यावसायिक बुद्धि लगाई और जिसमे ज्यादा पैसा मिला उसे ही परोस दिया। हालाँकि ऐसा करके वे अपनी नैतिक जिम्मेवारिओं और अपनी काम की जिम्मेदारिओं से धोखा किया है।

आईये जानते हैं यह टी आर पी है क्या चीज़ ?

टी आर पी  क्या है  What is TRP

टी आर पी टीवी प्रोग्रामों की लोकप्रियता का एक पैमाना है जिससे किसी चैनल या किसी खास प्रोग्राम की लोकप्रियता मापी जाती है। यह टीवी पर विज्ञापनदाताओं को विज्ञापन देने में मदद करता है। इसी के आधार …

Box Office Kya Hai

जब भी फिल्मों की बात होती है तो एक शब्द जरूर सुनने को मिलता है और वह शब्द है "बॉक्स ऑफिस" .  कई बार सुनने को मिलता है इस फिल्म का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन इतना रहा या यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धराशायी हो गयी। पिछले दिनों दंगल और बाहुबली के सन्दर्भ में भी कहा गया कि इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़ दिए और बॉक्स ऑफिस पर नए रिकॉर्ड बनाये हैं।

Kuchh To Log Kahenge Logon Ka Kaam Hai Kahna

एक बार की बात है। एक आदमी अपने लड़के के साथ कहीं जा रहा था। उसके साथ  उसका गदहा भी था। उस आदमी ने सोचा मेरा लड़का मुझसे छोटा है अतः उसे गदहे  पर बिठा देते हैं। यह सोच कर उसने अपने लडके को गदहे पर बैठा दिया और  खुद पैदल चलने लगा। कुछ दूर चलने पर उन्हें एक गॉव मिला। जब गांव के लोगों ने उन्हें देखा तो वे उन पर हॅसने लगे। गॉव वालो ने कहा देखो देखो जवान लड़का खुद गदहे पर जा रहा है और बूढ़े बाप को पैदल ले जा रहा है। यह सुनकर लड़के को बड़ी शर्म आयी। वह नीचे उतर आया और अपने पिताजी को गदहे पर बिठा दिया। वे दोनों आगे बढ़ने लगे।आगे चलने पर वे फिर एक गांव से होकर गुजरे। वहा काफी सारे लोग खड़े थे।  उन्होंने जब उन्हें देखा तो जोर जोर से हसने लगे। उन्होंने कहा देखो कितना बेशर्म इंसान है बच्चे पर दया नहीं आ रही। उसे पैदल लिए जा रहा है और खुद आराम से गदहे पर चल रहा है। इतना सुनते ही उसने अपने लड़के से कहा बेटा तुम भी आओ और इस पर बैठ के चलो। लड़का गदहे की पीठ पर अपने पिता के साथ बैठ गया।अबकी बार वे एक भीड़ भाड़ वाले बाजार से गुजरे। लोगो ने उन्हें फिर टोकना शुरू कर दिया। लोग कहने लगे कैसे निर्दयी इंसान हैं एक कमजोर…

Mahilaon Dwara Ghar Baithe Karne wale 10 Business

आज के इस मंहगाई के युग में यह बहुत ही जरुरी हो चूका है कि परिवार में पति पत्नी दोनों कमाये। इसके साथ ही महिलाएं अपने घर के कामों से खाली हो कर चाहती हैं कि कुछ करें अपनी प्रतिभा को निखारे तथा साथ ही आत्मनिर्भर या स्वालम्बी बने। अधिकांश घरों में महिलाएं घर की जिम्मेदारिओं में ऐसी उलझी रहती हैं कि वे चाह कर भी कोई बड़ा बिजिनेस या जॉब नहीं कर सकती। बड़े बिजिनेस  या जॉब के लिए ज्यादा समय देना पड़ेगा और ज्यादा समय घर से बाहर गुजारना भी पड़ेगा जो कि कई बार संभव नहीं हो पाता। घर की जिम्मेदारिओं को इग्नोर कर व्यवसाय करने का असर परिवार और बच्चों पर पड़ने लगता है। तो क्या महिलाएं स्वालम्बी नहीं बने ? नहीं बिलकुल नहीं। तो आईये देखते हैं कुछ ऐसे व्यवसाय जो घर से किये जा सकते हैं और बहुत ही काम पूंजी में शुरू भी हो सकते हैं :


10 बिजिनेस जो महिलाएं घर बैठे कम पूंजी में शुरू कर सकती हैं :
टेलरिंग का व्यवसाय :कपड़े हर व्यक्ति की जरुरत है और फैशन के इस दौर में हर दूसरे दिन नए कपड़ों की डिमांड इस बिजिनेस को काफी अच्छा स्कोप देता है। थोड़ी ट्रेनिंग के साथ इस व्यवसाय को शुरू किया जा सकता है। यह अपने घर से किया जा …